दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शुक्रवार को एक बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। इस उग्र प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP), CPI(M), SFI, DYFI, AISA और कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी थी।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए आप नेता आतिशी, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज, सीपीआई(एम) की वरिष्ठ नेता वृंदा करात, योगेंद्र यादव, और एसएफआई नेता आइशी घोष सहित लगभग 1,100 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, झड़प के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं, हालांकि कुछ हिरासत में लिए गए लोगों को बाद में रिहा कर दिया गया।
दिग्गज नेताओं और दलों के तीखे तेवर
हिरासत में लिए जाने के बाद नेताओं ने केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन पर जमकर हमला बोला। आप नेता आतिशी ने कड़े शब्दों में कहा, "जो लोग नरेंद्र मोदी के खिलाफ खड़े होंगे, उन्हें पुलिस द्वारा गिरफ्तार या हिरासत में लिया जाएगा।" वहीं, सांसद संजय सिंह ने पुलिस पर उन्हें संसद जाने से रोकने का गंभीर आरोप लगाया। सीपीआई(एम) नेता वृंदा करात ने गिरफ्तारी के बाद बयान दिया कि "आज दिल्ली की हर गली जंतर-मंतर बन चुकी है।"
एसएफआई और वामपंथी छात्र संगठनों ने "ज्ञानेश ब्रो, इट्स टाइम टू गो" के नारों के साथ सीईसी के तत्काल इस्तीफे की मांग की। आम आदमी पार्टी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा कि "सत्याग्रह, ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें!" दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने खुद जंतर-मंतर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी। इस राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन ने चुनावी पारदर्शिता और आयोग की भूमिका पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





