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रिपोर्ट्स • दिल्ली

AAP को बड़ा झटका: टीवी पर पार्टी का मजबूत पक्ष रखने वाली प्रियंका कक्कड़ कांग्रेस में शामिल

AAP की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने अरविंद केजरीवाल की पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। जानिए उनके इस फैसले की मुख्य वजह।

AAP को बड़ा झटका: टीवी पर पार्टी का मजबूत पक्ष रखने वाली प्रियंका कक्कड़ कांग्रेस में शामिल
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आम आदमी पार्टी (AAP) को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता और टीवी डिबेट्स में अरविंद केजरीवाल का मजबूती से पक्ष रखने वाली वरिष्ठ नेता प्रियंका कक्कड़ ने आम आदमी पार्टी का साथ छोड़ दिया है। शनिवार को उन्होंने औपचारिक रूप से कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया। उनके साथ रजत राकेश टंडन और पूर्व विधायक श्याम सुंदर शर्मा ने भी दिल्ली कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव, राजीव शुक्ला और पवन खेड़ा की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।

पेशे से वकील प्रियंका कक्कड़ आम आदमी पार्टी का एक चर्चित और आक्रामक चेहरा रही हैं। टीवी डिबेट्स में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ताओं के साथ उनकी बहस के वीडियो सोशल मीडिया पर अक्सर वायरल होते रहते थे।

'मुझे वही पुरानी दिल्ली वापस चाहिए' कांग्रेस का हाथ थामने के बाद प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि वह एक स्वच्छ, सुरक्षित, हरी-भरी और प्रगतिशील दिल्ली वापस चाहती हैं, जैसी दिल्ली में वह पली-बढ़ी थीं। उन्होंने कहा कि एक दशक के राजनीतिक अनुभव के बाद उन्हें यह अहसास हुआ कि केवल कांग्रेस ही दिल्ली का सही विकास कर सकती है। इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी की तारीफ करते हुए उन्हें आज के दौर का सबसे विश्वसनीय नेता करार दिया।

'बंगला और चॉपर' का जिक्र कर केजरीवाल पर साधा निशाना आम आदमी पार्टी छोड़ने की मुख्य वजहों का खुलासा करते हुए प्रियंका ने सीधे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 'आप' की शुरुआत आम आदमी की राजनीति, सादगी और "बंगला-गाड़ी न लेने" के वादों के साथ हुई थी, लेकिन बाद में नेता निजी यात्राओं के लिए चॉपर का इस्तेमाल करने लगे। प्रियंका ने कहा कि वह टीवी पर इस तरह के विरोधाभासों का बचाव नहीं कर पा रही थीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने शुरुआत में देश के कई बुद्धिमान लोगों को जोड़ा था, लेकिन शीर्ष नेतृत्व उन्हें संभालकर रखने में पूरी तरह विफल रहा। उन्होंने यह भी कहा कि जिन नए लोगों ने बूथ स्तर पर काम तक नहीं किया, उन्हें पंजाब और राजस्थान में बड़े पद, गाड़ियां और बंगले बांटे जा रहे हैं, जिसे सही ठहराना उनके लिए असंभव हो गया था।