Mumbai:
महाराष्ट्र में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस चोक्कलिंगम ने चुनाव आयोग (EC) से ECINet सॉफ्टवेयर में चार महत्वपूर्ण बदलाव करने की मांग की है। उन्होंने चुनावी रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (EROs) को 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' (तार्किक विसंगति) वाले मामलों में फैसला लेने के लिए अधिक अधिकार देने और दस्तावेजों से संतुष्ट होने पर मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई से छूट देने की सिफारिश की है।
क्या है मामला और CEO ने क्या मांग की?
महाराष्ट्र वर्तमान में SIR प्रक्रिया के नोटिस चरण में है। चुनाव आयोग को भेजे पत्र में CEO एस चोक्कलिंगम ने कहा कि EROs को रिकॉर्ड में विसंगतियों के मामलों में सुनवाई के बाद निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
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व्यक्तिगत सुनवाई से छूट: यदि कोई मतदाता पर्याप्त दस्तावेज जमा कर देता है और ERO उससे संतुष्ट है, तो उसे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट दी जानी चाहिए।
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चुनाव आयुक्तों का समर्थन: EROs को अधिक अधिकार देने की इस मांग का समर्थन चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू भी पहले कर चुके हैं, जिनका मानना था कि केंद्रीकृत नियंत्रण से अधिकारियों के वैधानिक अधिकार सीमित हो रहे हैं।
'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' (Logical Discrepancy) क्या है?
SIR प्रक्रिया के दौरान ECINet सॉफ्टवेयर मतदाता के रिकॉर्ड को उसके माता-पिता या दादा-दादी के पिछले रिकॉर्ड से जोड़ता है। इस मिलान के दौरान यदि माता-पिता के नाम या उम्र में कोई अंतर आता है, तो सॉफ्टवेयर इसे 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के रूप में चिह्नित करता है।
नोट: इसका अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति फर्जी मतदाता है; यह केवल रिकॉर्ड के बीच जानकारी मेल न खाने की एक स्थिति है।
चुनाव आयोग (EC) का रुख
26 सितंबर को हुई चुनाव आयोग की बैठक के बाद आयोग ने महाराष्ट्र CEO की मांगों के एक हिस्से को स्वीकार कर लिया।
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EROs को अब 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' वाले मामलों में संतुष्ट होने पर मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई से छूट देने का अधिकार दे दिया गया है।
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आयोग ने स्पष्ट किया कि राज्यों से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई अपग्रेड किए जा चुके हैं और आगे भी फील्ड अधिकारियों को आवश्यकतानुसार लचीलापन प्रदान किया जाएगा।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2 करोड़ से अधिक नाम हटे
महाराष्ट्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त को जारी की गई थी, जिसमें मतदाताओं की संख्या में 21.1% की कमी दर्ज की गई है। CEO एस चोक्कलिंगम के अनुसार, हटाए गए 2 करोड़ से अधिक नामों में से अधिकांश ऐसे लोग हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो गए हैं। राज्य की अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को प्रकाशित होगी।





