इवांका की भारत यात्रा
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इवांका की भारत यात्रा

Author: calender  06 Dec 2017

इवांका की भारत यात्रा

अतिथि देवो भव, यह भारत की प्राचीन परंपरा है। और अतिथि अमरीकी हो, गोरी चमड़ी का हो, वहां के राष्ट्रपति के परिवार से हो, तो उसके आगे बिछ जाना, यह शायद आज के भारत का रिवाज है। हैदराबाद में तीन दिनों के विश्व उद्यमिता सम्मेलन (जीईसी) के लिए अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी और सलाहकार इवांका ट्रंप भारत पहुंची, तो उनका स्वागत हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया। निजी तौर पर हो सकता है बराक के बाद डोनाल्ड भी उनके मित्र बन गए हों और मित्र की बेटी की अगवानी के लिए पहुंचना कोई गलत बात नहीं है। ऐसे ही पारिवारिक रिश्ते निभाने मोदीजी नवाज शरीफ के घर भी पहुंच गए थे। लेकिन इवांका ट्रंप कोई राजनेता नहीं हैं, अमरीकी सरकार में किसी राजनैतिक पद पर नहीं हैं, तो हमारे प्रधानसेवक जी किस नाते उनका स्वागत करने पहुंचे, यह उन्हें बताना चाहिए। तीन दिनों के इस उद्यमिता सम्मेलन का उद्घाटन इवांका ट्रंप और नरेन्द्र मोदी ने साथ में किया। अपने भाषण में इवांका ने कुछ अच्छी-अच्छी बातें कहने की औपचारिकताएं निभाईं। और लगे हाथ मोदीजी के चाय बेचने से लेकर राजनेता बनने तक की सफलता का जिक्र भी किया। गुजरात चुनाव के ऐन पहले जब कांग्रेस नरेन्द्र मोदी को एक बार फिर चाय वाला बोलने पर घिर चुकी है और मोदीजी इसका जवाब वहां चुनावी रैली में दे रहे हैं, तब इवांका ट्रंप के मुंह से भी चाय बेचने की तारीफ करवाना क्या कोई राजनैतिक दांव है? इवांका व्यापार के लिए भारत आई हैं और उनके पास मौका था कि वे नरेन्द्र मोदी के तीन साल के कार्यकाल में व्यापारिक और आर्थिक मोर्चे पर लिए गए फैसलों पर बात करतीं। चाहतीं तो नोटबंदी, जीएसटी, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया किसी की भी तारीफ करतीं, यह सब छोड़ कर उन्हें चाय बेचने से लेकर राजनेता बनने की बात ही क्यों याद आई, यह सोचने वाली बात है। विचार का मुद्दा यह भी है कि इवांका ट्रंप के हाथ में कौन सी जादू की छड़ी थी कि उनका ऐसा शाही अतिथि सत्कार हुआ। प्रधानमंत्री ने उनका स्वागत ही नहीं किया, रात में उनके लिए फलकनुमा पैलेस में शाही दावत भी रखी गई। होटल में तब्दील हो चुके निजाम के इस मशहूर महल की डाइनिंग टेबल दुनिया में सबसे बड़ी है और इस पर एक साथ 101 लोग भोजन कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने इवांका को गुजरात के सडेली क्राफ्ट का एक खूबसूरत लकड़ी का डिब्बा भी उपहार में दिया। इवांका ट्रंप के लिए यह शाही इंतजाम निश्चित ही सरकारी खर्च पर हो रहा है, तो इसका कितना बोझ जनता पर पड़ेगा। इसके बदले जनता को क्या हासिल होगा, यह जानने की उत्सुकता रहेगी। क्योंकि विश्व उद्यमिता सम्मेलन तो व्यापारियों, कारोबारियों के लिए है, जहां केवल मुनाफे की बात होगी। जबकि जनता तो अब तक घाटे में ही रहती आई है। हैदराबाद शहर में इवांका के आगमन की तैयारी बीते कई दिनों से चल रही थी। यहां के पुलिस कमिश्नर एम महेंद्र रेड्डी ने हैदराबाद में भीख मांगने पर दो महीने की रोक लगा दी है, जो आठ नवंबर की सुबह 6 बजे से शुरू होकर सात जनवरी 2018 तक लागू रहेगी। शहर के कई भिखारियों को चंचलगुडा जेल के आनंद आश्रम में पुनर्वास के लिए भेज दिया गया है और बहुत से भिखारी भागकर पड़ोसी राज्यों में चले गए हैं। यहां का प्रशासन शहर को भिखारी मुक्त बनाना चाहता है। लेकिन इसकी टाइमिंग ऐसी है कि मालूम पड़ता है यह कदम इवांका की यात्रा के मद्देनजर उठाया गया है। प्रशासन इससे इनकार करता है, लेकिन इसी हैदराबाद में मार्च 2000 में भी भिखारियों को भगा दिया गया था, तब अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन यात्रा पर आए थे। गरीबी को भुगतने का दावा करने वाले और गरीबों का दुख दर्द दूर करने के सपने दिखाने वाले मोदीजी को क्या भिखारी गरीब नहींलगते या फिर उन्हें इंसान ही नहींं माना जाता है, इसलिए जब चाहे खदेड़नेे का अधिकार प्रशासन को दिया गया है? वैसे दोहरे मापदंड रखने में इवांका ट्रंप भी कहां पीछे हैं? वे एक सफल व्यवसायी और अब राष्ट्रपति बन चुके पिता की सफल व्यवसायी संतान हैं। भारत भी वे अपने व्यापार का हित साधने ही आई हैं। अपने भाषण में उन्होंने दुनिया की आधी आबादी यानी महिलाओं के हित का मुद्दा उठाया, उनके कारोबार करने की संभावनाओं पर चर्चा की, उनके लिए वेतन और सुविधाओं की बात की, लेकिन उनकी खुद की कंपनी बांग्लादेश, इंडोनेशिया, चीन और भारत में जिन कारखानों का बना सामान लेती है, उसमें महिलाएं कई घंटे काम कर के भी पूरा वेतन नहींपाती है, इस बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा, न ही अब तक कुछ किया है। फैशनेबल कपड़े और अन्य श्रृंगारिक वस्तुओं का व्यापार करने वाली इवांका ट्रंप भी अन्य कारोबारियों की तरह ही प्राफिट फर्स्ट के मंत्र को ही मानती होंगी और अमरीकी राष्ट्रपति की बेटी होने के नाते अमेरिका फर्स्ट भी इसमें जुड़ा होगा। हम भारतीयों के लिए अपना देश फर्स्ट है या नहीं, अब यह हमें सोचना होगा।

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