सैक्स, सीडी और राजनीति
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सैक्स, सीडी और राजनीति

Author:   15 Nov 2017

सैक्स, सीडी और राजनीति

राजनीति संसद भवन और सचिवालयों से निकल कर गली और सड़कों से होती हुई कब बेडरूम तक पहुँच जाती है, अंदाज़ा नहीं लगता। राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता, शत्रुता में तब्दील हो चुकी है और राजनीति युद्ध बन चुका है। युद्ध में साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाने की परंपरा आदि काल से ही रही है। और अब यही नीति राजनीति में भी अपनाई जाने लगी है। राजनैतिक गलियारों में विपक्षियों के चरित्र हनन के लिए सैक्स का प्रयोग आम होने लगा है। सेक्स एक ऐसा मसाला है जिसका प्रयोग फिल्मों के बिज़नेस को आसमान तक पहुँचाने के लिए बॉलीवुड के बड़े बड़े फिल्मकार करते हैं। एक ऐसी लत है जिससे जीवन के एक कालावधि में शायद ही कोई व्यक्ति बचा हो और जिसके कारण पोर्न इंडस्ट्री लगातार फल फूल रही है। यद्यपि भारत में कानूनी रूप से वैध ऐसी इंडस्ट्री नहीं है लेकिन इस इंडस्ट्री को दुनिया में सर्वाधिक दर्शक अपने देश से ही मिलते हैं। खजुराहो का मंदिर तथा अजंता और एलोरा की गुफाएँ जिस देश के स्थापत्य कला का नमूना है, कामसूत्र जिस देश की रचना है; उस देश में सेक्स को लेकर लोगों ने काफी पूर्वग्रह पाली हुई है। किसी व्यक्ति ने अगर शादी किए बग़ैर सेक्स किया हो और लोगों को इसका पता चल जाए तो यह समाज उस व्यक्ति को ताउम्र सिर उठा कर नहीं चलने देती। एक धारणा बन जाती है कि वह व्यक्ति चारित्रिक स्तर पर हीन है। यह बात सब जानते हैं कि राजनीति धारणाओं का खेल है। लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं, यह अधिक महत्वपूर्ण है बजाय इसके कि आप क्या हैं? बस इसी बात का फायदा उठाते हुए कई बार चारित्रिक रूप से प्रतिद्वंद्वी को समाज के नज़र में गिराने के लिए सैक्स सीडी का प्रयोग होता रहा है। दिग्विजय सिंह से लेकर एन डी तिवारी तक सैक्स सीडी या फोटो लीक के पीड़ितों की सूची में हैं। इस सूची में हार्दिक पटेल का नाम जुड़ गया है। गुजरात के पाटीदारों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले हार्दिक बड़ी तीव्र गति से राजनीति के आसमान में उभरे। उम्र इतनी कम कि चुनाव भी नहीं लड़ सकते लेकिन ताक़त इतनी ज़्यादा कि भारत की सबसे बड़ी पार्टी ख़ौफ़ज़दा है। दरअसल, हार्दिक ने बीजेपी का वोटबैंक माने जाने वाले पाटीदारों को बीजेपी के ख़िलाफ़ लाकर खड़ा कर दिया है। नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद गुजरात में बीजेपी के पास कोई ऐसा चेहरा बचा नहीं है, जिसके दम पर चुनावों में जीत की गारंटी मिल सके। इसके अलावा केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों, विशेषत: जीएसटी के कारण छोटे व्यापारी जो बीजेपी के परंपरागत वोटर हैं, पार्टी से नाराज़ चल रहे हैं। इसके अलावा राहुल गाँधी भी इन चुनावों में अभूतपूर्व सक्रियता दिखा रहे हैं। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर कहीं न कहीं उन्होंने बीजेपी को अच्छी चुनौती दी है। इन कारणों से गुजरात की सत्ता पर पिछले 20 वर्षों काबिज़ बीजेपी की नींद उड़ी हुई है। संभव है कि जिग्नेश, अल्पेश और हार्दिक को साधने के लिए बीजेपी ने हार्दिक के चरित्रहनन की कोशिश की हो। संभव है कि पॉर्न को बंद करने की बात करने वाली बीजेपी खुद राजनेताओं की सैक्स सीडी लाँच कर रही हो। पिछले दिनों हार्दिक पटेल ऐसा अंदेशा जता भी चुके थे। सवाल यह उठता है कि क्या बीजेपी इतना अपरिपक्व राजनीति कर सकती है? बेशक़ संभावनाएँ कम हों लेकिन मुमकिन ये भी है कि यह सीडी लीक हार्दिक पटेल का सियासी दाँव हो। राजनीति में संभावनाओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। ख़ैर, सच और झूठ का फैसला भविष्य के गर्भ में छिपा है। एक बात तो तय है कि दोषी चाहे जो भी हो, पीड़ित राजनीति, लोकतंत्र और आम जनता ही हैं।

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