आधार की संवैधानिकता पर नजर
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आधार की संवैधानिकता पर नजर

Author: calender  07 Nov 2017

आधार की संवैधानिकता पर नजर

आधार कार्ड योजना से बैंक खातों, मोबाइल कनेक्शन और लोक-कल्याण योजनाओं के लाभों को जोड़ने की केंद्र सरकार की कोशिश संवैधानिक है या नहीं, ये सवाल अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार भी इस योजना के खिलाफ याचिका लेकर अदालत पहुंच गई। इससे अजीब स्थिति पैदा हुई। इसी सिलसिले में सर्वोच्च न्यायालय ने ये महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाया कि संसद से पारित किसी कानून को कोई राज्य सरकार कैसे चुनौती दे सकती है? स्पष्टत: पश्चिम बंगाल सरकार ने संघीय ढांचे की मर्यादाओं का ख्याल नहीं किया। इसलिए अदालत को स्पष्ट करना पड़ा कि केंद्र की किसी को पहल चुनौती सिर्फ कोई नागरिक ही दे सकता है। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए जजों ने कहा- 'ममता बनर्जी व्यक्तिगत रूप से याचिका दें, तो हम उस पर सुनवाई करेंगे। जहां तक 'आधार योजना पर उठे संवैधानिक सवालों की बात है, तो वो पहले ही कई याचिकाओं के जरिए सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुंच चुके हैं। इनका शीघ्र समाधान हो, यह न सिर्फ याचिकाकर्ता, बल्कि सरकार भी चाहती है। एटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सरकार अपना पक्ष रखने को तैयार है। अगर न्यायालय को आवश्यक लगे, तो वह संविधान पीठ बना सकता है। संतोष की बात है कि कोर्ट ने तुरंत इस सुझाव पर कदम उठाया। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा ने आधार योजना से जुड़ी तमाम याचिकाओं पर सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ बनाने की घोषणा की। ये बेंच नवंबर के आखिरी हफ्ते से सुनवाई शुरू कर देगी। अब अपेक्षित है कि सार्वजनिक चर्चाओं में आधार योजना से संबंधित चर्चाओं और अफवाहों पर तुरंत विराम लगे। एटॉर्नी जनरल ने जिक्र किया कि इस संबंध में कई झूठी बातें फैलाई गई हैं। मसलन, यह निराधार भय फैलाया गया है कि सीबीएसई परीक्षाओं में भाग लेने के लिए छात्रों के पास आधार कार्ड होना जरूरी है। ऐसी बातों से अच्छे उद्देश्य से लागू की जा रही इस महत्वपूर्ण योजना को लेकर लोगों में बेवजह अंदेशे पैदा होते हैं। जबकि आवश्यकता लोगों में यह भरोसा पैदा करने की है कि आधार कार्ड उनके और देश के भले के लिए है। इसके जरिए किसी से कोई जोर-जबर्दस्ती नहीं की जा रही है। अब सबके लिए उचित यह होगा कि वे संविधान पीठ के निर्णय का इंतजार करें। सरकार विभिन्न् सेवाओं को आधार कार्ड से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है, लेकिन कोर्ट का फैसला आने तक इसे किसी क्षेत्र में अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए। कुछ याचिकाओं में दलील दी गई है कि आधार योजना नागरिकों की निजता में दखल है। पिछले अगस्त में सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने निजता को नागरिकों का मौलिक अधिकार घोषित किया था। उसके बाद कुछ हलकों से दलील दी गई कि अब आधार योजना की वैधानिक स्थिति कमजोर हो गई है। इन सारी बातों से ऊहापोह बढ़ा है। उम्मीद है कि यह भ्रम जल्द ही छंट जाएगा और आधार कार्ड के संवैधानिक एवं वैधानिक आधार पर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

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