बचेगा तख़्त-ओ-ताज़ या लुटेगी लाज! घोषित हुई गुजरात चुनावों की तारीख़
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बचेगा तख़्त-ओ-ताज़ या लुटेगी लाज! घोषित हुई गुजरात चुनावों की तारीख़

Author: Neeraj Jha calender  31 Jan 2018

बचेगा तख़्त-ओ-ताज़ या लुटेगी लाज! घोषित हुई गुजरात चुनावों की तारीख़

उत्सुकता भरे इंतज़ार के बाद आख़िरकर गुजरात विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया गया। 9 और 14 दिसंबर को दो चरणों में चुनाव करवाया जाएगा और मतगणना 18 दिसंबर को होगी। तारीख़ों के ऐलान के साथ ही मनोरंजक दिख रहे चुनाव को समय की सीमा में बाँध भी दिया गया है। बीजेपी हो या कांग्रेस; अब दोनों के पास अपने अपने करतब दिखाने के लिए गिनती के दिन ही बचे हैं। इन चुनावों में एक ओर लगभग 22वर्षों से प्रदेश की सत्ता पर काबिज़ बीजेपी अपने तख़्त-ओ-ताज़ बचाने के लिए लड़ेगी वहीं दूसरी ओर राजनैतिक मैदान पर लगातार पटखनी खा रही कांग्रेस राजनैतिक संजीवनी के लिए संघर्ष करेगी। गुजरात के ये विधानसभा चुनाव बहुत से कारणों के लिए चर्चा में बने हुए हैं। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही चुनाव जीतने के लिए सिर से पैर तक का ज़ोर लगा रही है। गुजरात, प्रधानमंत्री मोदी का गृह राज्य है और उनके चेहरे की बदौलत ही पार्टी ने राज्य में एकछत्र राज्य स्थापित किया है। लेकिन इन चुनावों में वो खुद मुख्यमंत्री पद का चेहरा नहीं होंगे। इसके अलावा, प्रदेश के अन्य किसी भी बीजेपी नेता का कद इतना बड़ा नहीं कि उनके दम पर चुनाव लड़ा और जीता जा सके। एक व्यक्ति पर निर्भरता की भारी क़ीमत पार्टी को चुनावों मे चुकानी पड़ सकती है। कांग्रेस बीजेपी की इस दुखती रग को पहचानती है और इसी कारण इन दिनों राहुल गाँधी अपने राजनैतिक करियर में सर्वाधिक आक्रामक दिख रहे हैं। केंद्र सरकार पर किए गए प्रहारों को लेकर राहुल सोशल मीडिया में काफी लोकप्रिय हैं। "विकास पगला गया है" और " गब्बर सिंह टैक्स" जैसे उनके जुमले अख़बारों, टीवी बहसों आदि में ट्रेंड कर रहे हैं। इसके अलावा खुद प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री द्वारा राहुल के बातों का जवाब दिया जाना, राहुल की बढ़ती लोकप्रियता का सबूत है। बीते सालों में कांग्रेस गुजरात में कोई चेहरा विकसित नहीं कर पाई जिस के दम पर वो नरेंद्र मोदी को चुनौती दे सके। लेकिन अब जब मोदी, राज्य से उठकर राष्ट्रीय स्तर पर पहुँच गए हैं तो कहीं न कहीं एक खाली स्थान पैदा हो गया है। कांग्रेस आगामी चुनावों में इसी खाली स्थान को भरने की कोशिश कर रही है। अपनी इन कोशिशों के अंतर्गत कांग्रेस गुजरात की राजनीति में सक्रिय तीन अति महत्वपूर्ण युवाओं को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है। ये तीन युवा हैं- अल्पेश ठाकोर, हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवानी। ये तीनों युवा नेता गुजरात में अपने कामों के ज़रिए ख़ासे लोकप्रिय हो रहे हैं। अल्पेश ओबीसी के हितों के लिए लड़ रहे हैं तो हार्दिक पाटीदारों को आरक्षण दिलवाने के लिए और जिग्नेश दलितों के हितों के लिए प्रयासरत हैं। इन तीनों के उद्देश्य अलग भी हैं और आपस में प्रतिद्वंद्वी भी। तीनों का अपने-अपने तबके में अच्छा खासा जनाधार है। तीनों युवा नेताओं ने वर्तमान सरकार के ख़िलाफ माहौल बनाने में सफलता भी हासिल की है। कांग्रेस इन तीनों के जनाधार को अपने पक्ष में मोड़ने का पुरज़ोर प्रयास कर रही है। अल्पेश जा़हिर तौर पर कांग्रेस में वापिस आए हैं वहीं हार्दिक और जिग्नेश का कांग्रेस प्रेम भी नज़र आ ही रहा है। लेकिन मुख्य सवाल ये कि कांग्रेस का अपना कोई नेता सरकार के ख़िलाफ किसी तरह का माहौल नहीं बना पाया है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या दूसरों की बैसाख़ियों के सहारे कांग्रेस बीजेपी के विजय रथ से आगे निकल पाएगी? ख़ैर, कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए ये चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। कांग्रेस का प्रदर्शन काफी हद तक कांग्रेस के संभावित आगामी अध्यक्ष राहुल गाँधी के भविष्य का भी फैसला करेगा। जबकि बीजेपी का प्रदर्शन लोकप्रियता के शिखर पर सवार भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का आँकलन करेगा।

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