खुद रामभक्त "श्री राम" को डर की निशानी बना देंगे!
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खुद रामभक्त "श्री राम" को डर की निशानी बना देंगे!

Author: Neeraj Jha calender  25 Jul 2019

खुद रामभक्त "श्री राम" को डर की निशानी बना देंगे!

अगर आपकी दाढ़ी खास करीने से बढ़ी हुई है, आप मूँछ नहीं रखते और सिर पर खास टोपी पहनते हैं; मतलब अगर आप सीधे तौर पर मुसलमान दिखते हैं, तो कभी भी और कहीं भी एक भीड़ आपको रोक सकती है। आपका नाम पूछ सकती है। आपकी टोपी उतारकार फेंक सकती है और आपसे जबरन जय श्री राम के नारे लगवा सकती है। आपको ये नारा लगाना पड़ेगा। नहीं लगाएँगे तो मारे जाएंगे। दोहरा चरित्र ये है कि मुसलमानों को टोपी फेंकने के लिए मजबूर करने वाली भीड़ में वो लोग भी शामिल होते होंगे जिन्हें फिल्म केसरी में अक्षय कुमार द्वारा पगड़ी न उतारने की ज़िद पागल बना गई थी। 

मोदी साहब के पीएम बनने के बाद की घटनाओं में उपर की बातें बहुत कॉमन हैं। पश्चिम बंगाल हो या हरियाणा, बिहार हो या झारखंड, महाराष्ट्र हो या उत्तर प्रदेश लगभग हर राज्य में जय श्री राम का नारा हिंसा का आधार बना। 

क्या जय श्री राम एक आध्यात्मिक/ऐतिहासिक संबोधन है? अगर आप अभिवादन के शब्दों के ऐतिहासिक सफर के बारे में पढ़ेंगे तो पाएँगे कि आपने राम-राम सुना होगा, जय सिया-राम सुना होगा या फिर जय राम जी की सुना होगा। जय श्री राम अभिवादन का शब्द कभी नहीं रहा। 

जय श्री राम का नारा लोकप्रिय हुआ रामानंद सागर के सीरियल रामयण से। जब राम-रावण युद्ध के दौरान हनुमान राम की वानरी सेना के उत्साह को बढ़ाने के लिए जय श्री राम बोलते थे और समस्त वानरी सेना पुनरावृत्ति में जय श्री राम का उद्धोष करती थी। ये 1980 का दौर था।

इसी दौर में विश्व हिंदू परिषद देश पर हिंदुत्व का रंग चढ़ाने की कोशिशें कर रही थी। लोकप्रिय धारावाहिक से निकला एक लोकप्रिय नारा विहिप का राजनैतिक नारा बन गया। जय श्री राम को राम जन्मभूमि आंदोलन में जमकर प्रयोग किया गया। भगवा वेश धरे हुए हिंदुत्ववादियों के हाथों में हथियार और मुँह पर जय श्री राम के ओजस्वी नारे से आई आक्रामक लालिमा हिंदुत्व की सिग्नेचर इमेज बन गई।

1990-92 के दौर में यह नारा बीजेपी ने ज़ोरों-शोरों से अपनाया। फिर चुनाव-दर-चुनाव जय श्री राम गूँजता रहा और बीजेपी का ग्राफ बढ़ता रहा। बीजेपी ने एक ऐसे वोटबैंक का निर्माण कर लिया जिसकी रीढ़ हिंदू आस्था प्रतीक राम थे। 2014 में मोदी सत्ता की केंद्र में आए और इसके बाद से जय श्री राम नारे की उग्रता बढ़ी। 2019 में मोदी दोबारा आए लेकिन जिस ऐतिहासिक मैनडेट के साथ मोदी आए उससे कहीं अधिक उग्रता के साथ जय श्री राम का नारा राजनैतिक पटल पर उभरा। 

जय श्री राम के नारे के साये में हिंसा पलने लगी, लोग मरने लगे, बीजेपी के विपक्षी इस साये में कमज़ोर होने लगे। यूट्यूब, ट्विटर औऱ फेसबुक पर जय श्री राम के साथ भड़काऊ कंटेंट जमकर फैलाया जा रहा है। हिंदुत्ववादी संगठनों ने लोगों के मन से जय श्री राम नारे के प्रति आदर का भाव छीनकर डर के भाव से भर दिया है। आज जय श्री राम आदर की नहीं बल्कि डर की निशानी हैं। हालात ऐसे हैं कि अगर खुद राम आकर कहें कि मेरे नाम पर हिंसा मत फैलाओ, तो ये उन्मादी भीड़ राम की भी मॉब लिंचिंग कर दे। 

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