युद्ध नहीं बल्कि शांति ही है पीड़ाओं का अंत!
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युद्ध नहीं बल्कि शांति ही है पीड़ाओं का अंत!

Author: Neeraj Jha calender  27 Feb 2019

युद्ध नहीं बल्कि शांति ही है पीड़ाओं का अंत!

...तो क्या युद्ध शुरू होने वाला है। कल और आज लगभग पूरा देश ये सवाल पूछ रहा है। जवाब केवल सरकार के पास है लेकिन जवाब दे रहे हैं प्राइम टाइम में बैठे एंकर्स और सोशल मीडिया वॉरियर्स।

पुलवामा में हमला होता है और हमारे 44 जवान शहीद (आधिकारिक तौर पर दर्ज़ा नहीं) हो जाते हैं। सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनल्स के रणक्षेत्र पर पाकिस्तान को नक्शे से मिटा देने की कवायद शुरू हो जाती है। भारत मंगलवार सुबह एयर स्ट्राइक करता है। पाकिस्तान की सीमा के अंदर घुसकर आतंकी प्रशिक्षण शिविर पर हमले करता है। पाकिस्तान सीज़फ़ायर वॉयलेशन करता है और भारतीय सेना जवाबी कार्यवाही करती है।

पाकिस्तानी मीडिया कह रही है कि उन्होंने भारत के एक पाइलट को पकड़ लिया है। भारतीय मीडिया इस बारे में चुप है। भारतीय मीडिया कह रही है कि आतंकी मारे गए हैं। पाकिस्तानी मीडिया इस बात पर चुप है। युद्ध शुरू नहीं हुआ है। लेकिन कैजुआलिटी शुरू हो गई है। सच इस युद्ध का सबसे पहला शिकार बन चुका है।



ख़ैर, इन सबके बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म युद्धोन्माद में अंधा हुआ जा रहा है। कोई भारत सरकार का ऑफीशियल स्टेटमेंट नहीं सुन रहा। सरकार की जानिब से साफ़ कहा गया है कि यह एक असैन्य कार्यवाही है और इसकी मंशा इस मुद्दे को बढ़ा कर युद्ध तक ले जाने की नहीं है।

पाकिस्तान ने किसी भी तरह की क्षति से इंकार किया है। मतलब मुमकिन है कि पाकिस्तान भी ऑफीशियली वॉर में शामिल नहीं होना चाहता। लेकिन पाकिस्तान और भारत के महत्वपूर्ण एयरपोर्ट को बंद कर देना घटना की संवेदनशीलता की तरफ इशारा करती है।

सीमा पर जारी तनाव असाधारण है और सुरक्षा की दृष्टि से माहौल चिंताजनक। अगर युद्ध हुआ तो आम लोगों के साथ बड़े उद्योग घराने भी तबाह हो जाएँगे। यही उद्योग घराने राजनैतिक पार्टियों की रीढ़ होती है। इसलिए युद्ध को अंतिम स्तर तक टालने की ही कोशिश की जाएगी।

युद्धोन्माद ज़रूर फैलाया जाएगा। और इसी प्रक्रिया में जिस तरह का माहौल सोशल मीडिया पर बन रहा है या बनाया जा रहा है, उससे - 

मध्यमवर्गीय लोगों में एक राष्ट्रवादी इमोशनल हार्मोन संचरित होगा, जिसका फ़ायदा न केवल पब्लिक कमिटमेंट्स पूरा न कर पाने वाली सरकारों बल्कि बड़े उद्योगपतियों को भी होगा।



सो, ज़रूरी है कि अपनी अपनी कैपेसिटीज़ में हम युद्ध का विरोध करें। भ्रामक ख़बरों से बचें। फेसबुक और व्हाट्सऐप यूनीवर्सिटी के ज्ञान को कुछ दिनों के लिए छुट्टी पर भेजें। ऑफीशियल स्टेटमेंट्स का इंतज़ार करें। युद्ध से किसी को कोई फ़ायदा नहीं होने वाला। आर्थिक ढ़ाँचे से लेकर सामाजिक ढ़ाँचे तक सब कुछ नष्ट हो जाएगा। देश कई साल पीछे चला जाएगा।

नेपोलियन के तानाशाह बनने के सफ़र को पढ़िए। किस तरह से युद्धोन्मादी ख़बरों और युद्धों के ज़रिए नेपोलियन ने तमाम बड़े सवालों को खत्म करवा दिया था। लोगों को राष्ट्रवादी युद्धोन्माद में धकेलकर सत्ता सुरक्षित रखा था। युद्ध हानिकर सभी के लिए है पर लाभप्रद केवल कुछ वर्गों के लिए। युद्ध शुरुआत है पीड़ाओ की। शांति अचूक है अंतिम है। अंतिम लक्ष्य की तरफ बढ़िए।


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