बिक रहा है ज़मीर, बन रही है लहर!
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बिक रहा है ज़मीर, बन रही है लहर!

Author: Neeraj Jha   21 Feb 2019

बिक रहा है ज़मीर, बन रही है लहर!

कोबरापोस्ट के एक स्टिंग के साथ ही ग्लैमर जगत के चमकीले सितारों का कालापन सामने आ गया। गुजरात भाजपा के नेता बयान देते हैं कि देश मे जो राष्ट्रवाद का लहर है उसे वोटों में बदलो।  कैसे बनता है ये लहर - जब कुछ प्रभावी लोग एक राजनैतिक पार्टी के साथ अपने ज़मीर का सौदा कर लेते हैं।। विलेन शक्ति कपूर से लेकर हीरोइन महिमा चौधरी और हीरो सोनू सूद, टीवी अभिनेता अमन वर्मा, हितेन तेजवानी, रोहित रॉय और सूफ़ी स्टार कैलाश खेर, सिंगर अभिजीत समेत राजू श्रीवास्तव औऱ सुनील पाल जैसे कॉमेडियन समेत लगभग 36 कलाकारों ने अपने आप को बेचकर राजनैतिक दल के पक्ष में माहौल बनाने की हामी भरी है।

दरअसल, कोबरापोस्ट की टीम एक झूठी कंपनी का आधार बनाकर एजेंट्स के माध्यम से इन सेलीब्रिटीज़ से मिली। इनसे सवाल किया - क्या आप किसी पार्टीविशेष के मैसेज को अपने सोशल प्लेटफॉर्म से सांझा करेंगे जिसका कंटेंट आपको भेजा जाएगा? अलग अलग सेलीब्रिटीज़ से लगभग 2 लाख रुपयों से लेकर 2.5 करोड़ रुपयों तक का नेगोसिएशन हुआ। राष्ट्रवादी सिंगर अभिजीत ने कहा कि वो अपने मोबाईल से ही शूट करके वीडियो अपलोड करेगे ताकि मैसेज रियल लग सके। पीएम का रोल निभाने वाले विवेक ओबरॉय ने जल्द से जल्द डील फाइनल करने की बात कही। सोनू सूद ने कहा कि मेरे द्वारा भेजे गए कंटेंट मजबूत और अच्छे होंगे। और इसके लिए 20 करोड़ रुपये चार्ज करूँगा। वहीं महिमा चौधरी ने कहा कि बीजेपी तो कुछ भी दे सकती है और इसलिए वे अपने मैसेज के लिए एक करोड़ रुपये चार्ज करूँगी। अलग अलग सेलीब्रिटीज़ की अलग अलग बात।

जो बात सबमें कॉमन थी वो ये कि लगभग सभी सेलीब्रिटीज़ पैसा कैश में लेना चाहते थे। शक्ति कपूर, मिनीषा लांबा, अमन वर्मा ये लोग सारा पैसा कैश में लेना चाहते थे ताकि टैक्स से बच सकें। गणेश आचार्य ने कहा कि दिए गए मैसेज को डांस से जोड़कर कुछ स्क्रिप्टिंग करेंगे ताकि ज्यादा लोगों तक पहुँच सकें। सुनील पॉल पैसे लेकर राहुल गाँधी का मख़ौल उड़ाने को तैयार थे। 

पैसे लेकर ये सिलीब्रिटीज़ फिल्में भी करते हैं, नाचते-गाते हैं, प्रोग्राम्स में अपीयर होते हैं। सोशल मीडिया सबको अपनी बात रखने का हक भी देती है। लेकिन पैसे लेकर किसी की जानिब से कोई बात रखना - ये लाखों फैन्स को धोक़ा देना है।पिछले साल कोबरापोस्ट ने न्यूज़ मीडिया संस्थानों के इस काले चेहरे को उजागर किया था। 

राजनीति को महँगा बनाने का एक प्रयोजन ये भी था। इतना पैसा इंवॉल्व हो जाए कि लोगों को खरीदना बड़ी बात न रहे। बड़े न्यूज़ संस्थान हों या प्रभआवी सेलीब्रिटीज़, क्या पता कल पता चले मंच पर कविता सुनाने वाले और मॉटीवेशनल स्पीकर्स कॉलेज स्कूल में पढ़ाने वाले प्रोफेसर सभी फेक प्रौपेगैंण्डा फैलाने के लिए खरीदे जा चुके हैं। 

मीडिया से जुड़े लोगों का इस तरह से बिक जाना लोकतंत्र की गालों पर तमाचा है। लाखों लोगों के द्वारा फॉलो किए जाने वाले लोग जब कोई बात कहते हैं तो उसका असर पड़ता है। लोग उनकी बातों में सच्चाई देखते हैं। इतना बड़ा आदमी कह रहा है तो कुछ न कुछ सही ही होगा। लेकिन लोगों को यह नहीं पता चलता कि ये बड़े दिखने वाले सेलीब्रिटीज़ चंद पैसों के लिए अपने ज़मीर का सौदा कर चुके हैं। 

ज़रूरी है ऐसे लोगों का डीपर आइडेंटीफिकेशन और बहिष्कार - इंडस्ट्री करे न करे, लोगों को ज़रूर करना चाहिए। ताकि लोगों की विचारधारा को गुलाम न बनाया जा सके।

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