देशवासियों की माँ-बहन-बेटियों को गरिया कर कैसे बच सकती है देश की इज्ज़त?
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देशवासियों की माँ-बहन-बेटियों को गरिया कर कैसे बच सकती है देश की इज्ज़त?

Author: Neeraj Jha calender  19 Feb 2019

 देशवासियों की माँ-बहन-बेटियों को गरिया कर कैसे बच सकती है देश की इज्ज़त?

देश की इज्ज़त देशवासियों की माँ-बहन-बेटियों को गरिया कर कैसे बचाई जा सकती है। देश और देशवासी अलग कैसे हो सकते हैं? बदला लेना था आतंकवादियों से - बदला लेने लगे कश्मीरियों से। सबक सिखाना था उन नेताओं को जो हर बार कड़ी शब्दों में निंदा कर जाते हैं - पर सबक सिखाने लगे पत्रकारों को। आतंकवादी गोलियाँ और स्वभाव से आतंकवाद के समर्थक लोग गालियाँ बरसाने में लगे हुए हैं। सत्ता एक्शंस के मंच पर मौन है - समाज का बचा हुआ ज़मीर सवाल पूछ रहा है - कठघरे में कौन?

NDTV के रवीश कुमार गालियों से भरे मैसेज प्राप्त करने वाले पत्रकारों में शायद शीर्ष पर हों। अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर इन मैसेज का स्क्रीनशॉट चस्पा करते हुए लिखा कि इस मैं अपनी माँ और बहन को दी गई ये गालियाँ भारत माता के राष्ट्र को समर्पित करता हूँ। 

अभिसार शर्मा ने भी हर मिनट बज रहे उनके फोन के कॉल रजिस्टर का स्क्रीनशॉट सोशल प्लेटफॉर्म पर सांझा किया और लिखा कि मुझे इन हरक़तों से चुप नहीं किया जा सकता है।

बरखा दत्त को देशभक्ति की भावना से लबरेज़ किसी मर्द देशभक्त ने शायद अपनी मर्दानगी की तस्वीर भेजी। 

दिल्ली के विधायक कपिल मिश्रा ने एक्ट्रेस स्वरा भास्कर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की। लेकिन उनकी ट्वीट को लगभग साढ़े चौदह हज़ार लोगों ने पसंद किया लगभग पौने सात हज़ार लोगों ने रीट्वीट किया। 

प्रशांत भूषण से लेकर शहला राशिद तक को गालियों से नवाज़ा गया है। 

गालियाँ देने वाले उन एंकरों पर भरोसा कर रहे हैं जो पत्रकार कारगिल वार में पैर गँवा चुके मेजर रैंक के व्यक्ति को बताते हैं कि आपने पुलवामा की तस्वीरें नहीं देखी इसलिए जंग का विरोध कर रहे हैं। 

गालियाँ देने वालों ने गालियाँ तो दी लेकिन यह सवाल नहीं पूछा कि

  • मिलिट्रिलाइज़्ड ज़ोन में सुरक्षा की ऐसी चूक कैसे हो गई?
  • क्यों प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और योगी हमले होने के बाद भी रैलियों में वोट माँगे जा रहे थे?
  • अगर युद्ध हुआ तो जान कौन गंवाएगा?

इन सब सवालों को नेपथ्य में रखकर,  भारत को माँ कहकर संबोधित करने वाले देशभक्त माँ, बहन की गालियों को इतनी आसानी से कैसे स्वीकार कर लेते हैं, चिंतनीय है।

अपनी अपनी क्षमताओं के अनुरूप युद्धोनमाद फैलाने की कोशिश रोहित सरदाना से लेकर अर्नब गोस्वामी तक ने की है। ये गालियाँ किस पार्टी की सोच से ताल्लुक रखने वाले लोग दे रहे हैं - इसकी तहकीकात ज्यादा मुश्किल नहीं। सारे नंबर सार्वजनिक हैं पर कार्यवाही के नाम पर सब ज़ीरो है।

कम से कम उस सोच में शामिल महिलाएँ, कम से कम विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, टेक्सटाइल मिनिस्टर स्मृति ईरानी माँ-बहनों के खिलाफ उगले जा रहे ज़हर के विरुद्ध खड़ी होंगी। 

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