सीबीआई को सरकार की धमकी, ज़्यादा उड़ोगे तो ठीक कर दिए जाओगे
Latest Article

सीबीआई को सरकार की धमकी, ज़्यादा उड़ोगे तो ठीक कर दिए जाओगे

Satya Hindi   30 Jan 2019

सीबीआई को सरकार की धमकी, ज़्यादा उड़ोगे तो ठीक कर दिए जाओगे

सीबीआई के एक एसपी की देश के पावरफुल कैबिनेट मिनिस्टर अरुण जेटली के सामने क्या औक़ात है? और अगर ऐसे पावरफ़ुल मिनिस्टर को वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री का साथ मिल जाए तो फिर उस बेचारे का क्या हस्र होगा? यह आसानी से सोचा जा सकता है। मैं कोई कथा-कहानी नहीं कह रहा हूँ, यह हक़ीक़त है।

सीबीआई का इस्तेमाल : क्यों सीबीआई के निशाने पर हैं विपक्षी दल?

आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर के ख़िलाफ़ अपने पति दीपक कोचर को फ़ायदा पहुँचाने के मामले में एफ़आईआर दर्ज़ होने के बाद सीबीआई के एसपी सुधांशु धर मिश्रा का तबादला कर दिया गया है। मिश्रा अब राँची में काम करेंगे। सुधांशु धर ने 22 जनवरी को इस मामले में एफ़आईआर दर्ज़ की थी।

तारीफ़ के बजाय मिली फटकार एफ़आईआर में चंदा कोचर, उनके पति और वीडियोकान ग्रुप के मालिक वी. एन. धूत और बैंक के ढेरों सीनियर अफ़सरों के नाम एफ़आईआर में डाले थे और उनके ख़िलाफ़ जाँच की बात की थी। सीबीआई के इस अफ़सर को तारीफ़ मिलने के बजाय जेटली की जमकर फटकार मिली।

न्यायपालिका पर सवाल : फ़ैसला अगर ख़िलाफ़ है, कह दो, जज बेईमान है जेटली इन दिनों बीमार हैं। वह इलाज कराने न्यूयार्क गए हुए हैं। वित्र मंत्रालय की ज़िम्मेदारी उनसे लेकर रेल मंत्री पीयूष गोयल को दे दी गई है। जेटली फ़ेसबुक पर काफ़ी सक्रिय हैं। उन्होंने फ़ौरन ही एसपी के एफ़आईआर दर्ज़ करने पर पर एक पोस्ट लिख मारी और एसपी की ऐसी-तैसी कर दी।

जेटली ने कहा था, ‘इंवेस्टिगेटिव एडवेंचरिज़्म’ 2

5 जनवरी को जेटली ने लिखा, ‘हजारों किमी दूर बैठे हुए जब मैं आईसीआईसीआई का केस देखता हूँ तो मुझे ध्यान आता है कि बजाय केस पर फ़ोकस करने के, यह मामला कहीं जाता हुआ नहीं दिखता है। अगर हम बैंकिंग सेक्टर के हर बड़े आदमी का नाम एफ़आईआर में डाल देंगे, सबूत या सबूत के बिना, तो फिर हम क्या हासिल करना चाह रहे हैं, क्या हम वाक़ई में नुक़सान नहीं कर रहे हैं?” फिर उन्होंने इसे ‘इंवेस्टिगेटिव एडवेंचरिज़्म’ कहा।

इंडियन एक्सप्रेस ने अफ़सर के तबादले की ख़बर छापी है। एक्सप्रेस ने जब जेटली की टिप्पणी पर सरकार की टिप्पणी माँगी तो सरकार की तरफ़ से कहा गया कि यह एक वरिष्ठ आदमी की सलाह थी। इसे सीबीआई के काम में दख़लंदाज़ी नहीं माना जाना चाहिए। सरकार के एक वरिष्ठ अफ़सर ने जेटली की तरफ़दारी की। उन्होंने कहा, ‘जेटली ने सही बात कही है। सिर्फ़ पूर्वानुमान के आधार पर ही सब को नहीं घसीटा जा सकता। बिना सबूत के बैंक के बोर्ड मेम्बर्स को नहीं लपेट सकते। अगर ऐसा हुआ तो कोई फ़ैसला ही नहीं लेगा।’ इन अफ़सर का यह भी कहना है कि सरकार का इस केस से कोई लेना-देना नहीं है। सरकार हमेशा ही सीबीआई से कोसों दूर रहती है।

रिश्वत लेने का है आरोप

चंदा कोचर पर यह आरोप है कि उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ रहते हुए वीडियोकान समूह को 3250 करोड़ रुपये का क़र्ज़ दिया। इसके छह महीने के बाद वीडियोकान समूह के वी. एन. धूत ने चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की एक कंपनी को 64 करोड़ रुपये दिए। दीपक कोचर ने यह कंपनी धूत के साथ मिलकर बनाई थी। और धूत ने इस कंपनी को पैसा आईसीआईसीआई बैंक से क़र्ज मिलने के छह महीने बाद दिया था। इंडियन एक्सप्रेस ने ही सबसे पहले यह ख़बर छापी थी। 

यह माना गया कि चंदा कोचर ने अपने पद का दुरूपयोग कर वीडियोकान ग्रुप को कर्ज़ दिलवाया और बदले में उनके पति की कंपनी में पैसा लगाया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि दीपक कोचर की कंपनी में लगने वाला पैसा एक तरह की घूस थी।

आईसीआईसीआई बैंक के बोर्ड ने अपनी जाँच में चंदा कोचर को बेग़ुनाह पाया। पर सीबीआई ने कोचर के ख़िलाफ़ जाँच जारी रखी और आख़िरकार चंदा को इस्तीफ़ा देना पड़ा।

सीबीआई ने एफ़आईआर में आईसीआईसीआई बैंक के मौजूदा सीईओ संदीप बख़्शी, बैंक के पूर्व कार्यकारी निदेशक के. राम कुमार, गोल्डमैन सैक्स के इंडिया चेयरमैन संजय चटर्जी, स्टैंडर्ड और चार्टर्ड बैंक के सीईओ ज़रीन दारूवाला, टाटा कैपिटल के राजीव श्रीवास्तव, न्यू डेवलपमेंट बैंक के के. वी. कामथ का नाम शामिल किया है। के. वी. कामथ का बड़ा सम्मान है। चंदा कोचर से पहले कामथ ही आईसीआईसीआई बैंक के सीईओ थे और 2015 में उन्होंने बैंक के चेयरमैन का पद छोड़ा था।

MOLITICS SURVEY

क्या लोकसभा चुनाव 2019 में नेता विकास के मुद्दों की जगह आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रहे हैं ??

हाँ
नहीं
अनिश्चित

TOTAL RESPONSES : 31

Caricatures
See more 
Political-Cartoon,Funny Political Cartoon
Political-Cartoon,Funny Political Cartoon

Suffering From Problem In Your Area ? Now Its Time To Raise Your Voice And Make Everyone Know