अशोक गहलोत ने छिड़का हेमाराम के "जले पर नमक" !!
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अशोक गहलोत ने छिड़का हेमाराम के "जले पर नमक" !!

Author: Nilanjay Tiwari   27 Dec 2018

अशोक गहलोत ने छिड़का हेमाराम के "जले पर नमक" !!

हाल ही में अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने अपने 23 सदस्ययी टीम का ऐलान किया था.| जिसमे कई दिगज्ज और पुराने नेताओं को जगह नहीं दी गयी थी. लेकिन मामला तब गड़बड़ाया जब जैसलमेर-बाड़मेर क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाले विधानसभा बायतु से नवनिर्वाचित विधायक को मंत्री मंडल में जगह दी गयी वहीँ बगल सीट से 5वीं बार विधायक चुने गए पूर्व राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया.

सूत्रों की माने तो खुद हरीश चौधरी हेमाराम जी के सिफारिश के लिए गए थे लेकिन वहां उन्हें ही मंत्रिमंडल में शामिल होने का अवसर दे दिया. अब घर आए लक्ष्मी और कैबिनेट की कुर्सी को कैसे नकार सकते हैं. हालाँकि बाद में खुद हरीश ने इस बात को स्वीकारा की वे गए तो हेमाराम जी के सिफारिश के लिए ही थे लेकिन वहां खेल कुछ और हो गया. हमेशा क्षेत्र में साथ दिखने वाले हरीश चौधरी और हेमाराम में इससे दूरिया बढ़ी हैं. वहीँ आज जब मंत्री मंडल के गठन के बाद एक बार फिर "गहलोत" ने "जले पर नमक छिड़कने" का काम किया है.

गुरु "गुड़" चेला "चीनी" !!

जो कभी क्षेत्र में साथ दिखते और साथ प्रचार किया करते थे, उन्हें अशोक गेहलोत ने अलग अलग करने का काम बखूबी किया है. पहले हेमाराम को मंत्रिमंडल में जगह नहीं दिया गया फिर हरीश चौधरी को वही विभाग सौंपा गया जो विभाग पहले "हेमाराम चौधरी" के पास कभी हुआ करता था. जैसल-बाड़मेर में हेमाराम चौधरी आज भी "पूर्व राजस्व मंत्री" से ही विख्यात हैं लेकिन आज उनका चेला ही उन्हें पछाड़ कर अब उसी दफ्तर, उसी कुर्सी और उन्हीं कागजों पर कलम फेरेगा जहाँ और जिसपर कभी हेमाराम चौधरी का हक़ हुआ करता थ.| 
गुरु हेमाराम चौधरी के नाम को उनके पद ने विस्थापित कर दिया था. कभी राजस्व मंत्री रहे हेमाराम को लोग पूर्व राजस्व मंत्री ही कहते रहे और इनका शागिर्द आज राजस्व मंत्री बन गया.

जैसलमेर-बाड़मेर में जहां हेमाराम के कद को कम किया गया वहीँ "हरीश चौधरी" का कद बढ़ता नजर आ रहा है. माना जाता है कभी सांसद रहे हरीश चौधरी को विधानसभा चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था और आज ये "सुझाव" ही उनपर भारी पड़ गया. हालाँकि सौम्य व सरल स्वभाव के हरीश शुरू से ही हेमाराम जी चौधरी को आदर्श मानते रहे और तवज्जो देते रहे. लेकिन कहीं ना कहीं अशोक ने कैबिनेट गठन से सिर्फ सीपी जोशी का कद कम नहीं किया बल्कि अमीन खान और हेमाराम जैसे दिगज्जो को संदेश दे दिया की "तुम्हारी जगह किसी और ने ले ली और कद भी तुम्हरा अब उतना नहीं जो तुम "मेरी" (अशोक गहलोत) बराबरी कर सको". मंत्रिमंडल में दिगज्जों को जगह नहीं देने से राजस्थान की राजनीति को उथल-पुथल का सामना करना पड़ सकता है. राजनैतिक भूचाल से बचने के लिए कांग्रेस रूठे हुए महानुभावों को विधानसभा अध्यक्ष, केंद्र की राजनीति और लोकसभा चुनावों बाद किसी नई ज़िम्मेदारी का "दिलासा" दे सकती है. 
 

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