अपने जात की वजह से "मुख्यमंत्री" दौड़ में मात खा सकता है ये नेता !!
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अपने जात की वजह से "मुख्यमंत्री" दौड़ में मात खा सकता है ये नेता !!

Author: Nilanjay Tiwari calender  13 Dec 2018

अपने जात की वजह से "मुख्यमंत्री" दौड़ में मात खा सकता है ये नेता !!

जातिगत समीकरण की बात करें तो सबसे ज्यादा वोट बैंक वाले ओबीसी वर्ग के नेता को छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री का बड़ा दावेदार माना जा रहा है| नतीजे घोषित होने के बाद कांग्रेस में अब मुख्यमंत्री चुनने को लेकर कवायद की जा रही है| प्रदेश का नया मुखिया बनने की दौड़ में कुछ दिग्गज नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं| इनमें से एक नेता को चुनना कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण भी बताया जा रहा है| क्योंकि कांग्रेस आलाकमान इन प्रदेशों में ऐसे चेहरे को सामने लाना चाहेगी, जिसे वो देशभर में प्रोजेक्ट कर सके और उस चेहरे का लाभ आने वाले लोकसभा चुनाव में मिल सके|

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री की रेस में शामिल ओबीसी वर्ग के चेहरों की बात करें तो तीन नाम सबसे आगे आते हैं| इनमें प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल, कांग्रेस के ओबीसी विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष ताम्रध्वज साहू और पूर्व केन्द्रीय मंत्री चरणदास महंत शामिल हैं| तीनों नेताओं ने अपनी अपनी सीट से बड़ी जीत हासिल की है|

जाती समीकरण के हिसाब से सौम्य स्वाभाव, राजा लेकिन फिर भी सादगी व कुरता पायजामा में प्रदेश भर में जनता के बीच जा जाकर उन्ही से राय मांग घोषणापत्र तैयार करने वाले सरगुजा राजा टी एस सिंह देव की दावेदारी सिर्फ इसलिए कमजोर हो रही है क्योंकि उनके नाम के आगे "राजा साहब" और वे कुर्मी, माली, आदिवासी समुदाय से नहीं आते हैं|  टीएस सिंहदेव छत्तीसगढ़ के सबसे अमीर विधायक हैं। इतना ही नहीं 2013 में मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और मिजोरम में चुने के गए सभी विधायकों में भी सबसे ज्यादा संपत्ति टीएस के पास ही है। कोई राजसी आयोजन न हो तो वे हमेशा सादे कुर्ते-पायजामे में ही नजर आते हैं। 

लेकिन राजनीती ने एक बार फिर बतला दिया की इस मैदान में सौम्य, सभ्य व अच्छे आचरण वाले नेताओं की जरूरत नहीं है| यहां सिर्फ वही कब्ज़ा हासिल कर सकते हैं जो असल में आलाकमान की जी हुजूरी, बेतुके बयानों व कुर्सी का धौंस रखते हों शायद इसलिए ही नेता प्रतिपक्ष रहे टी एस बाबा मुख्यमंत्री के रेस में पीछे नजर आ रहे हैं| क्योंकि गिनाए हुए इन तामाम चीजों की इनमे कमी है| ये ना ही कुर्सी का धौंस रखते हैं, ना ही बेतुके बयानों के लिए चर्चे में रहते हैं और ना ही आलाकमान की दिल्ली में जाकर जी हुजूरी करते हैं| तो जायज सी बात है कुर्सी उसी के पाले में जाएगी जिससे कुर्सी का सौदा करने वाले सांठ गाँठ कर लें| खैर अभी तो आलाकमान मध्य प्रदेश व राजस्थान की कुर्सी किसको सौंपे इसी में फसे हुए हैं| क्योंकि छत्तीसगढ़ में एक नेता सौम्य स्वाभाव का तो दूसरा कड़े तेवर का है तो इसी वजह से यहां उतना उथल पुथल नहीं है मध्य प्रदेश व राजस्थान की तरह| लेकिन जल्द ही साबित हो जाएगा की साफ़ छवि व सादगी पसंद टी एस बाबा को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा या फिर हमेशा चर्चा में रहने वाले प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल साहब को|

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