बुलेट गति से बदलती हरियाणा की राजनीति में, कौन कितने पानी में?
Latest Article

बुलेट गति से बदलती हरियाणा की राजनीति में, कौन कितने पानी में?

Author: Neeraj Jha calender  20 Nov 2018

बुलेट गति से बदलती हरियाणा की राजनीति में, कौन कितने पानी में?

हरियाणा विधानसभा चुनावों का रणक्षेत्र धीरे-धीरे तैयार हो रहा है। कुछ महीनों पहले तक ये युद्ध साफ तौर पर इनेलो बनाम कांग्रेस का दिख रहा था। और इनेलो थोड़ी मजबूत भी। लेकिन राजनीति की फर्राटा रफ्‍तार ने सारे समीकरण एकदम से बदल दिए हैं। और वह भी इस तरह से कि नेताओं से लेकर आम लोग और चुनाव विश्लेषक कह रहे होंगे - 

जितना तुम बदले हो, उतना नहीं बदला जाता

हरियाणा की सियासत में भूचाल

हरियाणा के सियासी ज़मीन पर इनेलो की आंतरिक लड़ाई के साथ एक बहुत बड़ा भूचाल आया है। कल ताऊ देवीलाल पार्क में कार्यकर्ता मीटिंग के दौरान अजय चौटाला द्वारा नई पार्टी का ऐलान इनेलो की सत्ता वापसी के सपनों पर बड़ा कुठाराघात साबित हो सकती है। इस भूचाल से भाजपा, कांग्रेस और शायद आम आदमी पार्टी को भी थोड़ी राहत मिल रही होगी। लेकिन वास्तव में इस फूट का फ़ायदा कांग्रेस को मिलने की संभावनाएँ ज्यादा हैं।

क्या हैं जातीय समीकरण?

हरियाणा में चुनाव के दौरान विकास और अन्य मुद्दों की अपेक्षा जातीय समीकरण बड़ी भूमिका निभाते हैं। 2014 के चुनावों में कांग्रेस की हार की सबसे बड़ी वज़ह 32 प्रतिशत जाट और जाट सिखों के वोट का बीजेपी के खेमे में खिसक जाना था। कांग्रेस को 20 फीसदी वोट मिले थे जबकि इनेलो को 24 और बीजेपी को 33। पिछले चुनावों में बीजेपी को मिली अप्रत्याशित सफलता के पीछे मोदी लहर और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की खराब छवि से इंकार नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस की स्थिति

जाट और जाट सिख वोटर्स राजनैतिक मैदान में भूपिंदर सिंह हुड्डा के करीबी माने जाते हैं। और अगर हुड्डा को चेहरा बनाया जाता है तो इस तबके का कांग्रेस में वापिस लौटने की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। दलित वोटर्स को सहेज कर रखने के उद्देश्य से कांग्रेस ने अशोक तँवर को प्रदेशाध्यक्ष का पद दिया हुआ है। हुड्डा 22 जिलों में मार्च करके शक्ति प्रदर्शन कर चुके हैं। पिछले कुछ दिनों में तँवर खेमे और हुड्डा खेमे को भी सीढे तौर पर उलझते नहीं देखा गया है। दोनों ही खेमे हाईकमान पर भरोसा जताते हुए कह रहे हैं कि सही समय पर सही फैसला लेगी।

इनेलो की हालत

नेता प्रतिपक्ष, अभय चौटाला की नज़र भी जाट-जाट सिख और दलित वोटबैंक पर टिकी हुई थी। कांग्रेस में हुड्डा-तँवर मतभेद के कारण अभय जाट-जाट सिख वोटर्स को अपने खेमे में देख रहे थे। बीएसपी 4 फीसदी वोट अपने दम पर हासिल करती है। गठबंधन के कारण ये 4 फीसदी वोट भी इनेलो के खेमे में जाएँगी। इस आधार पर अभय चौटाला 50 फीसदी से अधिक वोटर्स के साथ होने की बात कर रहे थे। लेकिन दुष्यंत, दिग्विजय और अजय चौटाला के निष्कासन और अजय द्वारा नई पार्टी का ऐलान अभय की उम्मीदों पर पानी फेर सकता है। इनेलो के वोट्स बिखरेंगे और इसका सीधा फ़ायदा कांग्रेस को होगा। 

बीजेपी कितने पानी में?

बीजेपी के पास इस कार्यकाल के दौरान किया गया ऐसा कोई काम नहीं है जिसे लेकर वह जनता के पास जाए। सो, बीजेपी खट्टर सरकार की ईमानदारी और व्यक्तिगत रूप से खट्टर की बेदाग़ छवि पर दाँव खेलना चाह रही है। लेकिन यह बेदाग़ छवि, इस कार्यकाल के दौरान बेरोज़गारी, महिलाओं पर बढ़ते अपराध और जातीय दंगों में दिखी प्रशासन की कमज़ोरी जनता के ज़ेहन से मिटा दे - इसकी सँभावनाएँ कम हैं। पूरे कार्यकाल के दौरान खट्टर अपने ही मंत्रियों और विधायकों के निशाने पर रहे हैं। और बीजेपी की ये आंतरिक कलह सबने देखी है।

आम आदमी पार्टी का कद

अगर बात आम आदमी पार्टी की की जाए, तो अरविंद केजरीवाल के गृह राज्य होने के अलावा और कुछ सकारात्मक पार्टी के लिए दिख नहीं रहा। प्रदेश में कोई ऐसा नेता आप में नहीं दिखता जिसकी जनता के बीच पैठ हो। दूसरे, पंजाब में चुनाव कैंपेन के दौरान अरविंद केजरीवाल द्वारा पंजाब का पानी पंजाब में ही रहेगा वाला बयान जनता ने भुलाया नहीं होगा। आम आदमी पार्टी, दिल्ली के अपने कामों को आधार बनाकर, कांग्रेस और इनेलो के भ्रष्टाचार पर हमला बोलकर और बीजेपी को एंटी-डिवेलपमेंट और अप्रभावी बताकर हरियाणा में जनता को लुभाने की कोशिश कर रही है।

कौन चल रहा है आगे?

इस समय सबसे बड़ी समस्या ये है कि हरियाणा विधानसभा के रणक्षेत्र की फौज़े एक दूसरे से लड़ने की बजाय आपस में लड़ रही हैं। इनेलो के अंदर ये लड़ाई अपने अंतिम परिणिति को प्राप्त हो चुकी है। कांग्रेस का अंतर्कलह फिलहाल शांत दिख रहा है। लेकिन नेतृत्व निर्धारण के बाद इस शांति को बरकरार रखना कांग्रेस के लिए मुश्किल साबित होगा। बीजेपी समझ चुकी है कि जनाधार कम है, और पिछले कार्यकाल को देखते हुए सत्ता बनाए रखने की संभावनाएँ भी कम दिख रही हैं। आम आदमी पार्टी, दिल्ली सा चमत्कार हरियाणा में दोहरा पाए - इसकी सँभावनाएँ न के बराबर हैं। फिलहाल हरियाणा के रणक्षेत्र में कांग्रेस अपने विरोधियों से थोड़ा आगे सफर कर रही है।

MOLITICS SURVEY

महाराष्ट्र में अगर शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के गठबंधन की सरकार बनती है तो क्या उसका हाल भी कर्नाटक जैसा होगा ?

TOTAL RESPONSES : 8

Caricatures
See more 
Political-Cartoon,Funny Political Cartoon
Political-Cartoon,Funny Political Cartoon

Suffering From Problem In Your Area ? Now Its Time To Raise Your Voice And Make Everyone Know