CBI वाली महाभारत के रचयिता कौन?
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CBI वाली महाभारत के रचयिता कौन?

Author: Neeraj Jha  27 Oct 2018

CBI वाली महाभारत के रचयिता कौन?

नंबर वन ऑफिसर का नंबर 2 के ऑफिसर पर आरोप। फिर आरोपों का पलटवार। फिर सीबीआई का सीबीआई पर रेड। सीबीआई ज़लील होने लगा लेकिन और ज़लालत बची थी। और वह पूरी हुई आधी रात के सरकार के फैसले के साथ। आलोक वर्मा को रिलीव कर दिया गया। अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया। 13 ऑफिर्स जो कि अस्थाना के खिलाफ जाँच कर रहे थे, उनका ट्रांसफर कर दिया गया। सीबीआई चीख चीख कर कह रही होगी - कोई तो रोक लो। ख़ैर आर यू अवेयर मिस्टर मोदी संवैधानिक संस्थाओं का इस तरह का दुरुपयोग लोकतंत्र को तोड़ रहा है। 

CBI की इस फ़ज़ीहत को दो अधिकारियों का झगड़ा कहकर पल्ला मत झाड़िए। ये सरकार की दखलअंदाज़ी का बड़ा उदाहरण है। ये गंभीर मस्सला है कि किस तरह से संस्थाओं को कमज़ोर किया जा रहा है।

क्या वज़ह हो सकती है आलोक वर्मा को रिलीव की। तीन तरह के नोशन हैं - एक सरकार का, एक विपक्षी नेताओं का और एक है एक्टिविस्ट्स का। सरकार कहती है कि मामला बड़ा पेचीदा हो गया था। सीबीआई का मखौल उड़ रहा था। इसलिए जाँच के उद्देश्य से उन्हें छुट्टी पर भेजा गया। विपक्षी नेताओं और एक्टिविस्ट्स का नोशन एक जैसा है। वे कहते हैं कि आलो वर्मा को राफेल डील की जाँच में इंट्रेस्ट लेने का ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है। राहुल गाँधी ने ट्वीट करके कहा कि ये फैसला साफ तौर पर दिखाता है कि राफेल के रास्ते में जो भी आएगा, वह मिटा दिया जाएगा। 

विपक्ष के नोशन में दम भी दिखता है। राकेश अस्थाना को पीएमओ की सिफारिश से CBI का स्पेशल डाइरेक्टर बनाया गया। एक्टिविस्ट्स और एनजीओ से लेकर खुद सीबीआई के चीफ ने भी उनकी नियुक्ति का विरोध किया। 

सीबीआई चीफ आलोक वर्मा ने कहा कि राकेश के उपर करप्शन के मामले की जाँच चल रही है और इस कारण से उन्हें प्रमोट नहीं किया जाना चाहिए। 

लेकिन कोर्ट से हरी झंडी मिली और अस्थाना की नियुक्ति हो गई। इसके बाद जून 2018 में आलोक वर्मा ने सीवीसी को एक ख़त लिखा कि उनकी गैरमौजूदगी में अस्थाना उन्हें रिप्रेजेंट नहीं करेंगे। 

21 अक्तूबर को CBI ने मोईन क़ुरैशी के मनी लॉण्ड्रिंग मामले में राकेश अस्थाना को रिश्वत लेने के लिए चार्ज किया। 

रिश्वत मनोज कुमार, जो कि एक दुबई बेस्ड इंवेस्टमेंट बैंकर हैं के ज़रिए हैदराबाद के व्यापारी सतीश सना द्वारा लिया गया। 

आरोपों का खुलासा मनोज कुमार के बयान से हुआ जिसमें उन्होंने कहा कि मोईन कुरैशी के खिलाफ चल रहे जाँच को कमज़ोर करने के लिए अस्थाना को 2 करोड़ रुपयों की रिश्वत दी गई। 

जाँच शुरू हुआ तो कुलबुलाहट पूरे तंत्र को हो गई। पीएम मोदी पहले आलोक वर्मा से मिले और फिर दोनों से। ख़ैर जो फैसला आया वह निराशजनक है। CBI, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने यूपीए सरकार के दौरान सरकार का तोता कहा था आज सरकार सच में उसे पिंजरे में कैद करती नज़र आ रही है।

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