BJP - चुनाव जीतने की मशीन या राजनैतिक पार्टी?

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BJP - चुनाव जीतने की मशीन या राजनैतिक पार्टी?

BJP - चुनाव जीतने की मशीन या राजनैतिक पार्टी?

Author: Neeraj Jha

राजस्थान में एससी-एसटी एक्ट के कारण राजपूतों की पार्टी से नाराज़गी, सीएम वसंधुरा राजे की गौरव यात्रा में पत्थरबाज़ी राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए भाषण का विषय होना चाहिए लेकिन उन्होंने चुना 2015 की मॉब लिंचिंग को और उसकी तुलना कर दी अपनी चुनावी जीतों से।

अमित शाह का बयान और मायने

अख़लाक़ हुआ तब भी जीते थे, अवॉर्ड वापसी हुई तब भी जीते थे, अब कुछ करेंगे तो भी जीतेंगे। भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता विजय के लिए दृढ़- निश्चित है। 

राजस्थान चुनाव के मद्देनज़र जयपुर में रैली कर रहे अमित शाह का यह बयान डरावना है। भारतीय राजनीति तुष्टिकरण और ध्रुवीकरण की ओछी नीतियों से हमेशा घायल होती रही है। इन नीतियों ने लोकतंत्र को लंगड़ा बना दिया है, जहाँ लोग, लोग न रहकर भक्त बन गए हैं। अमित शाह की ये रैली भक्तों के लिए ही थी। लोगों के लिए होती तो वे ऐसी बयानबाज़ी की हिमाक़त नहीं कर सकते थे।

क्या था अख़लाक़ की हत्या की पृष्ठभूमि

अख़लाक़ की हत्या 2015 में दादरी (उत्तर प्रदेश) में की गई थी। यह हत्या भीड़ ने की। कारण था - शक़। शक़ कि अख़लाक़ के घर विशेष प्रकार का मांस था। समाज के एक तबक़े ने इस हत्या का विरोध किया। देश में असहिष्णुता की बात की। उस तबके ने कहा कि देश अपने पारंपरिक सिद्धांतों से भटक रहा है। हर धर्म, मज़हब, विचारधारा और संप्रदाय का सम्मान करने वाला देश मज़हब और जाति के आधार पर असहिष्णु हो गया है। 

अवॉर्ड वापसी की दास्तान

इसी माहौल से दुखी होकर लेखकों के एक बड़े समूह ने अवॉर्ड वापसी की। सरकार द्वारा दिए गए सम्मान को विरोध स्वरूप लौटा दिया। कुछ न्यूज़ चैनल्स और मीडिया हाउसेज ने इन लेखकों की आलोचना की तो कुछ लोगों ने विरोध किया। आख़िरकार अवॉर्ड वापसी करने वालों को देश द्रोही कहा जाने लगा।

राष्ट्रवाद का खेल

हर उस व्यक्ति को जो सरकार की नीतियों का विरोध करता था, देशद्रोही कहा जाने लगा। और इन सरकार की नीतियों की समीक्षा और आलोचना करने वाले लोगों के कंधों पर बीजेपी सरकार ने राष्ट्रवाद का खेल शुरू किया। राष्ट्रभक्ति की नयी परिभाषाएँ गढ़ी और उन परिभाषाओं के दम पर देश को धर्म और जाति से इतर अलग ही मापदंडों पर विभाजित करने की शुरुआत की।

फ़र्जी राष्ट्रवाद की राजनीति का परिणाम

आज राष्ट्रवाद की उसी राजनीति के कारण मॉब लिंचिंग, ट्रॉलिंग, मार-पीट आदि आम हो गई है। आलोचक डरने लगे हैं। जो नहीं डरते, उनके साथ मार-पीट होती है। उन्हें गालियाँ दी जा रही हैं। उनको देशद्रोही, एंटी नेशनल, पाकिस्तानी आदि विशेषणों से संबोधित किया जाता है। उसी राष्ट्रवाद की राजनीति के कारण लोकतंत्र के सारे स्तंभों का धीरे धीरे गला घोंटा जा रहा है। सरकारी संस्थाओं को कमज़ोर किया जा रहा है।

संभव है कि बीजेपी राष्ट्रवाद की राजनीति करते हुए इन परिणामों से अवगत न रही हो। लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जबइस तरह भाषणों में उन घटनाओं और अपनी चुनावी जीत को तराज़ू के दो पलड़े में रखते हैं तो ये संभावना कमज़ोर हो जाती है। ये सब घटनाए साजिशन अंजाम दी गई लगती हैं।

BJP - चुनाव जीतने की मशीन या राजनैतिक पार्टी?

भारतीय जनता पार्टी एक राजनैतिक पार्टी है या चुनाव जीतने की मशीन? यह मंथन किया जाना आवश्यक है। राजनैतिक पार्टी अगर जीत की मशीन बन जाए तो सबसे ज्यादा ख़तरा लकतंत्र और लोगों को होता है। न्यूनतम नैतिक ज़िम्मेदारी जिसके अनुसार किसी भी तरह की हत्या का समर्थन न हो, राजनैतिक पार्टियों से अपेक्षित है।

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