दिल्ली से मंदसौर, कितनी बेटियाँ और?
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दिल्ली से मंदसौर, कितनी बेटियाँ और?

Author: Neeraj Jha calender  11 Jul 2018

दिल्ली से मंदसौर, कितनी बेटियाँ और?

सन् 2012 के निर्भया बलात्कार से मंदसौर में सात साल की बच्ची से बलात्कार तक क्या बदला है? बेटियाँ तब भी असुरक्षित थी, बेटियाँ आज भी असुरक्षित हैं। सरकारें तब भी मामले की निंदा करती थी और आज भी करती है। मीडिया पहले भी कुछ दिनों के लिए रेप के दम पर टीआरपी बटोर कर अगले रेप के इंतज़ार में लग जाता था, आज भी माहौल यही है। 

जो थोड़ा बहुत अंतर आया है वह भी सामने रखता हूँ। पहले हमारा देश महिलाओं के लिए असुरक्षित होने के मामले में चौथे स्थान पर था, आज हम शीर्ष पर हैं। पहले बलात्कारी के धर्म का जिक्र इतना नहीं हुआ करता था, जितना आज हो रहा है। पहले बलात्कारियों के समर्थन में इतनी आवाज़ें नहीं उठती थीं, जितनी आज उठ रही हैं। लेकिन किसी एक व्यक्ति पर इसका दोष नहीं मढ़ा जा सकता। रेप के बाद बलात्कारियों का समर्थन करने वालों को इसकी हिम्मत देश के राजनैतिक तंत्र से मिलती है। 

कठुआ में हुए आसिफ़ा रेप के बाद रेपिस्ट्स के समर्थन में निकाले गए जुलूस को याद कीजिए। बीजेपी के दो विधायक भी शामिल थे उस जुलूस में जिन्होंने बाद में पद से इस्तीफा भी दे दिया। उन्नाव रेप केस याद कीजिए। बीजेपी एमएलए कुलदीप सेंगर मुख्य आरोपी थे। सीबीआई जाँच चल रही है। इसी केस में कुलदीप के बचाव में एक अन्य बीजेपी विधायक ने कहा - कि तीन तीन बच्चों की माँ के साथ कौन रेप करेगा। 

राजनेताओं के बयान और उनका चरित्र

रेप को लेकर भारतीय राजनेताओं के बयान उनके चरित्र का पता देते हैं। बीजेपी, कांग्रेस, सपा, टीएमसी आदि राजनैतिक दलों के लोग अपने बयानों में रेप या रेपिस्ट का बचाव करते रहे हैं। 

रेप के बारे में बोलते हुए मुलायम सिंह यादव कहते हैं कि - लड़कों से ग़लतियाँ हो जाती हैं। 

इसी संबंध में बीजेपी सांसद हेमा मालिनी कहती हैं - आजकल रेप को बहुत ज्यादा पब्लिसिटी मिल रही है। 

चंडीगढ़ बीजेपी के उपाध्यक्ष कहते हैं - लड़की को 12 बजे घर से बाहर नहीं जाना चाहिए था। 

आंध्र प्रदेश के कांग्रेस चीफ़ कहते हैं - कि हमें आज़ादी आधी रात को मिली इसका मतलब यह नहीं कि लड़कियाँ आधी रात को सड़कों पर धूमेंगी। 

बीजेपी सांसद किरन खेर कहती हैं - कि जिस ऑटो में 3 पुरुष सवार हों उसमें महिला को बैठना ही नहीं चाहिए। 

टीएमसी के सांसद तपस पाल विपक्षियों को गुंडे भेजकर रेप करवाने की धमकी देते हैं।

संसद के अंदर है बलात्कारी मानसिकता के लोगों का जमावड़ा

यह केवल कुछ उदाहरण है। संसद के अंदर बलात्कारी मानसिकता के लोगों का जमावड़ा है। ऐसे लोग, जो देश को उस युग में धकेल देना चाहते हैं जहाँ न तो कोई संविधान था न नियम न कायदे। यही लोग मंचों पर चढ़कर महिला सशक्तिकरण का राग आलापते हैं। इन्हीं में से कुछ बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का नारा लगाते हैं। 

महिलाओं के विरुद्ध अपराध में लिप्त सबसे ज्यादा लोगों को टिकट दिया है बीजेपी ने

अगर बात टिकट बँटवारे की की जाए तो पिछले पाँच सालों में बीजेपी ने 47 ऐसे उम्मीदवारों को टिकट बाँटा है, जो महिलाओं के विरुद्ध हिंसा में संलिप्त थे। बहुजन समाज पार्टी ने ऐसे 35 लोगों को टिकट बाँटा है और कांग्रेस ने महिलाओं के विरुद्ध अपराध करने वाले 24 लोगों को अपनी पार्टी से चुनाव के लिए नामांकित किया है।

48 सांसदों पर महिलाओं के विरुद्ध अपराध दर्ज़

असोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफोर्म्स ने 738 सांसद और 4077 विधायकों का विश्लेषण किया, जिसके मुताबिक, देश के 48 सांसदों पर महिलाओं के विरुद्ध अपराध दर्ज़ हैं जबकि तीन विधायकों के ऊपर रेप केसेज़ दर्ज़ हैं। जिन तीन विधायकों पर रेप केस दर्ज़ हैं, वे हैं -

  • आँध्र प्रदेश से टीडीपी विधायक गोगुंतला सूर्यनारायण
  • गुजरात से बीजेपी विधायक जेठाभाई जी अहीर
  • बिहार से राजद विधायक गुलाब यादव

ये है जनप्रतिनिधियों की स्थिति। जनता ऐसे लोगों को अपने प्रतिनिधि के रूप में चुनने के लिए मजबूर है। क्योंकि राजनैतिक दल उन्हें विकल्प ही नहीं देते। दबंगई, रसूख़ और दौलत के आधार पर टिकट का बँटवारा किया जाता है। एक या दो पार्टी नहीं बल्कि इस हमाम में सब नंगे हैं। महिलाओं के विरुद्ध अपराध करने वाले सबसे ज्यादा लेजिस्लेटर्स भारतीय जनता पार्टी से संबंध रखते हैं। इसके बाद नंबर आता है शिवसेना का और फिर ममता बनर्जी की टीएमसी का। बीजेपी, शिवसेना और टीएमसी के 12, 7 और 6 विधायकों को महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामले में चार्ज किया जा चुका है।

रेप एक सामाजिक विसंगति है। और इससे बचने के लिए लोगों का दिमागी विकास अनिवार्य है। इसके लिए ज़रूरी है कि हर उस सोच को हराएँ जो किसी भी एंगल से रेप या रेपिस्ट्स को बढ़ावा देती हो। ऐसे लोगों को चुनकर संसद या विधानसभा में न भेजें जिनकी मानसिकता बलात्कारी है।

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