मोदी की हत्या की 'साज़िश', जो कुछ अब तक मालूम है
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मोदी की हत्या की 'साज़िश', जो कुछ अब तक मालूम है

Author:   13 Jun 2018

मोदी की हत्या की 'साज़िश', जो कुछ अब तक मालूम है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साज़िश की चर्चा मीडिया में और सोशल मीडिया पर ज़ोर-शोर से चल रही है, लेकिन बहुत कम जानकारी उपलब्ध है जिसे पुष्ट, आधिकारिक और प्रामाणिक माना जा सके.

कुछ लोगों की गिरफ़्तारी हुई है और उनके पास से एक चिट्ठी बरामद होने की बात कही जा रही है जिससे पता चलता है कि नक्सली पीएम मोदी की हत्या करने की साज़िश रच रहे थे.

इस मामले पर राजनीतिक बयानबाज़ियों का दौर जारी है, जहाँ बीजेपी और विपक्षी पार्टियों के नेता एक-दूसरे पर राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर बहुत कम जानकारी दी गई है.

दिल्ली में सोमवार को पीएम पर माओवादियों के हमले की साज़िश को लेकर गृह मंत्रालय ने आंतरिक सुरक्षा की समीक्षा की.

गिरफ़्तार किए गए लोगों को 'माओवादियों का संपर्क-सूत्र' और उनके 'शहरी नेटवर्क का हिस्सा' बताया गया है और 'उनसे निबटने के लिए' एक योजना भी तैयार की जा रही है.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, गृह सचिव और इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक के अलावा माओवादी हिंसा से प्रभावित राज्यों के पुलिस अधिकारियों के साथ सोमवार को लंबी बैठक की.

इस बैठक में नए सिरे से नक्सल विरोधी अभियान चलाने की योजना तैयार की गई.

दलित-आदिवासी-नक्सली एंगल

पेशवा की सेना के ख़िलाफ़ अँग्रेज़ों की तरफ़ से लड़े दलितों की जीत की 200वीं वर्षगांठ का आयोजन पुणे के कोरेगाँव-भीमा में किया गया था, इस आयोजन में दलितों और सवर्णों के बीच टकराव हुआ था जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे.

वर्षगांठ का आयोजन दलितों के संगठन 'एल्गार परिषद' ने किया था, जिसके लिए प्रशासन से अनुमति भी ली गई थी.

हिंसा के बाद दो एफ़आइआर दर्ज की गईं, पुणे पुलिस से संयुक्त आयुक्त रविंद्र कदम के अनुसार ये मामले विश्रामबा पुलिस स्टेशन में दर्ज किए गए.

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एक एफ़आईआर में कबीर कला मंच नाम के सांस्कृतिक मंच को अभियुक्त बनाया गया जबकि दूसरी एफ़आईआर में गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और जेएनयू के छात्र रहे उमर ख़ालिद को अभियुक्त बनाया गया. इन दोनों पर अपने भाषणों से दलितों को भड़काने का आरोप है.

पुलिस का कहना है कि कबीर कला मंच का संबंध माओवादियों से है. पुणे की पुलिस ने इस हिंसा के बाद पांच अलग-अलग दलों का गठन किया है जो मामले की जांच में लगे हैं.

पुणे की पुलिस के अनुसार, 'एल्गार परिषद' के नेताओं, सदस्यों और कार्यकर्ताओं की जाँच की जा रही थी.

इसी जांच के दौरान 'एल्गार परिषद' के नेताओं की ईमेलों की भी जांच की गई. पुलिस का दावा है कि इसी दौरान वो ई-मेल भी सामने आया, 'किसी कॉमरेड प्रकाश' को किसी 'एम' ने लिखा था.

पुलिस का दावा है कि इसी मेल में राजीव गांधी हत्याकांड की तर्ज़ पर पीएम मोदी पर हमला करने की बात कही गई है.

पुणे पुलिस के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि माओवादियों ने ही कोरेगाँव-भीमा में पेशवा की हार की 200वीं बरसी के आयोजन में आर्थिक मदद की थी.

गिरफ्तारियाँ

इस पूरे प्रकरण में पाँच लोगों के विभिन्न ठिकानों पर छापामारी की गई. दिल्ली, मुंबई, पुणे और नागपुर में की गई इन छापामारियों के बाद पुलिस दावा कर रही है कि उसने माओवादियों के 'शहरी' नेटवर्क का पता लगाने में कामयाबी हासिल की है.

इन पाँचों लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया और अब इनमें से चार पुलिस रिमांड पर हैं. 'अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट' यानी यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है.

दलित अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले जाने-माने कार्यकर्ता सुधीर ढवले कोरेगाँव-भीमा के कार्यक्रम के आयोजकों में थे. वे दलितों के अधिकारों को लेकर एक मराठी पत्रिका- 'विद्रोही' का संपादन भी करते हैं. पुलिस का आरोप है ढवले माओवादियों के 'शहरी नेटवर्क' का हिस्सा हैं.

शोमा सेन

पेशे से अंग्रेज़ी की प्रोफ़ेसर, शोमा सेन की गिरफ़्तारी नागपुर से की गई. उनके पति तुषार भट्टाचार्य को पिछले साल ही गुजरात पुलिस ने 'माओवादी समर्थक' होने के आरोप में गिरफ़्तार किया था.

आठ घंटों की छापामारी के बाद पुलिस का दल उन्हें नागपुर से पुणे ले गया. सेन पर भी माओवादियों का समर्थक होने का आरोप है.

सुरेंद्र गडलिंग

पेशे से वकील, सुरेंद्र गडलिंग 'इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ पीपल्स लॉयर्स' के महासचिव भी हैं. पुणे पुलिस का आरोप है कि गडलिंग माओवादियों को न सिर्फ़ क़ानूनी मदद देते थे बल्कि वो माओवादियों के 'शहरी नेटवर्क' की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में भी काम करते हैं.

महेश राउत

इससे पहले महेश राउत पर माओवादियों से संबंध रखने के आरोप तब लगे जब वो छत्तीसगढ़ में खदानों का विरोध करने के लिए लोगों को एकजुट करने में लगे थे. राउत को महाराष्ट्र के गढ़चिरोली से गिरफ़्तार किया गया.

रोना विल्सन

पुलिस का आरोप है कि रोना विल्सन, दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर जीएन साईंबाबा के क़रीबी साथियों में से एक हैं.

साईंबाबा को भी माओवादियों के 'शहरी नेटवर्क' में शामिल होने के आरोप में गिरफ़्तार किया जा चुका है.

फ़िलहाल विल्सन राजनितिक बांदियों की रिहाई के लिए बनी कमिटी- 'कमिटी फॉर द रिलीज़ ऑफ पोलिटिकल प्रिज़नर्स'- के जनसंपर्क सचिव हैं.

पुणे पुलिस के दल ने दिल्ली पुलिस की विशेष सेल की मदद से दिल्ली में उनके घर पार छापा मारा और उन्हें गिरफ़्तार कर लिया.

पुलिस का कहना है कि छापामारी अप्रैल माह में ही की गई थी, मगर जाँच में ज़ब्त की गई चीज़ों से उनके माओवादियों से संबंध का पता चला.

पुलिस का यह भी दावा है कि जिस 'ई-मेल' में प्रधानमंत्री पर हमला करने की बात कही गयी है वो विल्सन के यहाँ छापामारी में ही बरामद हुई है.

राजनीतिक हलचल

गिरफ़्तारियों और छापामरियों के बाद, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया के नेता और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने आरोप लगाया कि दलित कार्यकर्ताओं को माओवादी कहकर गिरफ़्तार करना ग़लत है. उन्होंने प्रधानमंत्री से ही मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है.

अठावले की मांग के बाद कांग्रेस पार्टी हरकत में आई. पार्टी के प्रवक्ता ने एक के बाद एक कई ट्वीट करके जानना चाहा ' कौन झूठ बोल रहा है? मंत्री या महाराष्ट्र की सरकार?'

कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला का कहना था कि अगर अठावले ग़लत कह रहे हैं तो उन पर कार्रवाई होनी चाहिए वरना पुलिस को बताना चाहिए कि उसके आरोपों का आधार क्या है.

वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार ने पुणे में समारोह में बोलते हुए आरोप लगाया कि "प्रगतिशील कार्यकर्ताओं को माओवादी कहकर फंसाया जा रहा है." पवार का कहना था कि माओवादियों के नाम पर वोट इकठ्ठा करने के लिए भारतीय जनता पार्टी हमदर्दी बटोरने की चाल चल रही है.

इसके जवाब में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि "शरद पवार ओछी राजनीति कर रहे हैं."

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