झूठ की फैक्ट्रियों का बढ़ रहा है चलन
Latest Article

झूठ की फैक्ट्रियों का बढ़ रहा है चलन

Author: calender  08 Sep 2017

झूठ की फैक्ट्रियों का बढ़ रहा है चलन

आज की मेनस्ट्रीम मीडिया केंद्र सरकार और बीजेपी के दिए आंकड़ों को जस का तस वेद वाक्य की तरह फैलाती रहती है. मेन स्ट्रीम मीडिया के लिए सरकार का बोला हुआ वेद वाक्य हो गया है. उसमें भी जो टीवी न्यूज चैनल हैं, वो इस काम में दस कदम आगे हैं. उदाहरण के लिए, जब रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली तो उस दिन बहुत सारे अंग्रज़ी टीवी चैनलों ने ख़बर चलाई कि सिर्फ एक घंटे में ट्वीटर पर राष्ट्रपति कोविंद के फोलोअर की संख्या 30 लाख हो गई है. वो चिल्लाते रहे कि 30 लाख बढ़ गया, 30लाख बढ़ गया. उनका मकसद यह बताना था कि कितने लोग कोविंद को सपोर्ट कर रहे हैं. बहुत से टीवी चैनल आज राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की टीम की तरह हो गए हैं. संघ का ही काम करते हैं. जबकि सच ये था कि उस दिन पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सरकारी अकाउंट नए राष्ट्रपति के नाम हो गया. जब ये बदलाव हुआ तब राष्ट्रपति भवन के फोलोअर अब कोविंद के फोलोअर हो गए. इसमें एक बात और भी गौर करने वाली ये है कि प्रणब मुखर्जी को भी तीस लाख से भी ज्यादा लोग ट्वीटर पर फोलो करते थे. कुछ हफ्ते पहले बंगलुरू में ज़ोरदार बारिश हुई. उस टाइम पर संघ के लोगों ने एक फोटो वायरल कराया. कैप्शन में लिखा था कि नासा ने मंगल ग्रह पर लोगों के चलने का फोटो जारी किया है. बंगलुरू नगरपालिका बीबीएमसी ने बयान दिया कि ये मंगल ग्रह का फोटो नहीं है. संघ का मकसद था, मंगल ग्रह का बताकर बंगलुरू का मज़ाक उड़ाना. जिससे लोग यह समझें कि बंगलुरू में सिद्धारमैया की सरकार ने कोई काम नही किया, यहां के रास्ते खराब हो गए हैं, इस तरह के प्रोपेगैंडा करके झूठी खबर फैलाना संघ का मकसद था. लेकिन ये उनको भारी पड़ गया था क्योंकि ये फोटो बंगलुरू का नहीं, महाराष्ट्र का था, जहां बीजेपी की सरकार है. हाल ही में पश्चिम बंगाल में जब दंगे हुए तो आर एस एस के लोगों ने दो पोस्टर जारी किए. एक पोस्टर का कैप्शन था, बंगाल जल रहा है, उसमें प्रोपर्टी के जलने की तस्वीर थी. दूसरे फोटो में एक महीला की साड़ी खींची जा रही है और कैप्शन है बंगाल में हिन्दु महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहा है. बहुत जल्दी ही इस फोटो का सच सामने आ गया. पहली तस्वीर 2002 के गुजरात दंगों की थी जब मुख्यमंत्री मोदी ही सरकार में थे. दूसरी तस्वीर में भोजपुरी सिनेमा के एक सीन की थी. सिर्फ आर एस एस ही नहीं बीजेपी के केंद्रीय मंत्री भी ऐसे फ़ेक न्यूज़ फैलाने में माहिर हैं. उदाहरण के लिए, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने फोटो शेयर किया कि जिसमें कुछ लोग तिरंगे में आग लगा रहे थे. फोटो के कैप्शन पर लिखा था गणतंत्र के दिवस हैदराबाद में तिरंगे को आग लगाया जा रहा है. अभी गूगल इमेज सर्च एक नया अप्लिकेशन आया है, उसमें आप किसी भी तस्वीर को डालकर जान सकते हैं कि ये कहां और कब की है. प्रतीक सिन्हा ने यही काम किया और उस अप्लिकेशन के ज़रिये गडकरी के शेयर किए गए फोटो की सच्चाई उजागर कर दी. पता चला कि ये फोटो हैदराबाद का नहीं है. पाकिस्तान का है जहां एक प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन भारत के विरोध में तिरंगे को जला रहा है. इसी तरह एक टीवी पैनल के डिस्कशन में बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि सरहद पर सैनिकों को तिरंगा लहराने में कितनी मुश्किलें आती हैं, फिर जे एन यू जैसे विश्वविद्यालयों में तिरंगा लहराने में क्या समस्या है. यह सवाप पूछकर संबित ने एक तस्वीर दिखाई. बाद में पता चला कि यह एक मशहूर तस्वीर है मगर इसमें भारतीय नहीं, अमरीकी सैनिक हैं. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमरीकी सैनिकों ने जब जापान के एक द्वीप पर क़ब्ज़ा किया तब उन्होंने अपना झंडा लहराया था. मगर फोटोशाप के ज़रिये संबित पात्रा लोगों को चकमा दे रहे थे. लेकिन ये उन्हें काफी भारी पड़ गया. ट्वीटर पर संबित पात्रा का लोगों ने काफी मज़ाक उड़ाया. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में एक तस्वीर साझा की. लिखा कि भारत 50,000 किलोमीटर रास्तों पर सरकार ने तीस लाख एल ई डी बल्ब लगा दिए हैं. मगर जो तस्वीर उन्होंने लगाई वो फेक निकली. भारत की नहीं, 2009 में जापान की तस्वीर की थी. इसी गोयल ने पहले भी एक ट्वीट किया था कि कोयले की आपूर्ति में सरकार ने 25,900 करोड़ की बचत की है. उस ट्वीट की तस्वीर भी झूठी निकली. छत्तीसगढ़ के पी डब्ल्यू डी मंत्री राजेश मूणत ने एक ब्रिज का फोटो शेयर किया. अपनी सरकार की कामयाबी बताई. उस ट्वीट को 2000 लाइक मिले. बाद में पता चला कि वो तस्वीर छत्तीसगढ़ की नहीं, वियतनाम की है. ऐसे फ़ेक न्यूज़ फैलाने में हमारे कर्नाटक के आर एस एस और बीजेपी लीडर भी कुछ कम नहीं हैं. कर्नाटक के सांसद प्रताप सिम्हा ने एक रिपोर्ट शेयर किया, कहा कि ये टाइम्स आफ इंडिय मे आया है. उसकी हेडलाइन ये थी कि हिन्दू लड़की को मुसलमान ने चाकू मारकर हत्या कर दी. दुनिया भर को नैतिकता का ज्ञान देने वाले प्रताप सिम्हा ने सच्चाई जानने की ज़रा भी कोशिश नहीं की. किसी भी अखबार ने इस न्यूज को नहीं छापा था बल्कि फोटोशाप के ज़रिए किसी दूसरे न्यूज़ में हेडलाइन लगा दिया गया था और हिन्दू मुस्लिम रंग दिया गया. इसके लिए टाइम्स आफ इंडिया का नाम इस्तमाल किया गया. जब हंगामा हुआ कि ये तो फ़ेक न्यूज़ है तो सांसद ने डिलिट कर दिया मगर माफी नहीं मांगी. सांप्रादायिक झूठ फैलाने पर कोई पछतावा ज़ाहिर नहीं किया.

MOLITICS SURVEY

ट्रैफिक रूल्स में हुए नए बदलाव जनता के लिए !

फायदेमंद
  33.33%
नुकसानदायक
  66.67%

TOTAL RESPONSES : 24

Caricatures
See more 
Political-Cartoon,Funny Political Cartoon
Political-Cartoon,Funny Political Cartoon

Suffering From Problem In Your Area ? Now Its Time To Raise Your Voice And Make Everyone Know