झूठी है 'यथा राजा- तथा प्रजा' की सीख
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झूठी है 'यथा राजा- तथा प्रजा' की सीख

Author: Neeraj Jha   19 Feb 2018

झूठी है 'यथा राजा- तथा प्रजा' की सीख

बड़ी लोकप्रिय सूक्ति है - यथा राजा तथा प्रजा मतलब जैसा राजा होता है, वैसी ही प्रजा होती है। लेकिन सच्चाई के धरातल पर यह बात बिल्कुल भी ठीक प्रतीत नहीं होती। Global Hunger Index के एक हालिया रिपोर्ट में 119 देशों की सूची में भारत को उन 44 देशों में आता है, जिसे भुखमरी के मामले में गंभीर श्रेणी में रखा गया है। ये है भारत की प्रजा के हालात और अगर बात करें राजाओं की मतलब देश के अलग अलग राज्यों के सीएम की तो बता दें कि 81% भारतीय मुख्यमंत्री करोड़पति हैं, जिनमें से दो मुख्यमंत्रियों के पास १०० करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है जबकि 55 प्रतिशत सीएम के पास 1-10 करोड़ तक की संपत्ति है। स्पष्ट है कि यथा राजा तथा प्रजा की सीख झूठी है।

देश का युवा रोज़गार के लिए भटकता रहता है।सरकारी नौकरियों की राह देखते देखते उसकी आँखे पथरा जाती हैं और जब प्रधानमंत्री से बेरोज़गारी के बाबत सवाल पूछा जाता है, तो वो कहते हैं कि पकौड़ा बेचना भी एक तरह का रोज़गार है। देश की जनता को पकौड़े बेचने में लगाकर खुद नोट छापने का राजनैतिक प्रचलन किसी एक पार्टी या क्षेत्र का नहीं बल्कि कमोबेश पूरे देश का है। 

ख़ैर, Association of Democratic Reforms तथा National Election Watch के द्वारा जारी किए गए एक रिपोर्ट में भारत के मुख्यमंत्रियों के बारे में और भी अनेकानेक सूचनाएँ शामिल हैं- 

आपराधिक रिकॉर्ड - 

भारत के 26 प्रतिशत मुख्यमंत्रियों पर गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज़ हैं। बीजेपी के देवेंद्र फड़णवीस महाराष्ट्र के साथ साथ इस सूची का भी नेतृत्व कर रहे हैं। देवेंद्र फड़णवीस पर हत्या, हत्या की कोशिश, बेइमानी समेत अन्य आपराधिक मुकदमे दर्ज़ हैं। दूसरे नंबर पर हैं केरल के पिनरई विजयन और तीसरे नंबर पर हैं - देश की राजनीति को नई दिशा देने की बात कहकर जनआंदोलन से राजनीति में आए अरविंद केजरीवाल। 

शिक्षा -

संगीन अपराधों में संलिप्त इन मुख्यमंत्रियों की शिक्षा पर नज़र डालें तो हैरानी बढ़ जाती है। देश के ३२ प्रतिशत मुख्यमंत्रियों ने प्रोफेशनल शिक्षा ली हुई है। वहीं ३९ प्रतिशत ग्रेजुएट हैं। 16 प्रतिशत मुख्यमंत्रियों ने पोस्ट ग्रेजुएशन की हुई है जबकि 3 प्रतिशत मुख्यमंत्रियों के पास डॉक्टरेट की डिग्री है। केवल 10 फीसदी मुख्यमंत्री ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई नहीं कर पाए।

पढ़े - लिखे अपराधी - 

आपराधिक मामलों में शीर्ष पर चल रहे देवेंद्र फड़णवीस शिक्षा से एक लॉ ग्रेजुएट हैं। पिनरई विजयन ग्रेजुएट जबकि अरविंद केजरीवाल एक ग्रेजुएट प्रोफेशनल। अच्छी शिक्षा पाने वाले ये मुख्यमंत्री आपराधिक मामलों की सूची में टॉप थ्री में हैं।

नेता अमीर जनता गरीब - 

आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू शीर्ष स्थान पर काबिज हैं। नंबर दो पर हैं अरुणाचाल के प्रेमा खांडू। और तीसरे नंबर पर हैं पंजाब के कैप्टन अमरिंदर सिंह। प्रति व्यक्ति आय के आँकडों के मुताबिक ये राज्य 15वें, 12वें और 19वें स्थान पर हैं। मतलब कि जनता और जनता की आय जाए भाड़ में, अपनी तिजोरी भरती रहे - यही इन नेताओं की नीति है। वैसे, मानिक सरकार, ममता बनर्जी और महबूबा मुफ़्ती सबसे कम संपत्ति वाले सीएम हैं।

उपर के आँकड़ों से राजनीति के चरित्र का पता चलता है। जिन लोगों को नैतिकता के उदाहरण समाज में रखने चाहिए, उनका नैतिकता से कोई लेना देना ही नहीं रह गया है। शिक्षा और आचरण में कोई बैलेंस नहीं दिखता है। यही कारण है कि ज़रूरी मुद्दों की जगह राम मंदिर, हिंदु मुसलमान, गाय, हज आदि ने ले लिया है। संविधान राजनीति पर चैक रखने की ज़िम्मेदारी और अधिकार जनतो को देता है। जब तक हम इसका उपयोग नहीं करेंगे, तब तक राजनीति और राजनेताओं को कोसने के अलावा कुछ नहीं कर पाएँगे।

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