दस बार जब पीएम मोदी ने 2017 में देश को गुमराह किया
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दस बार जब पीएम मोदी ने 2017 में देश को गुमराह किया

Author: Adarsh Kumar calender  15 Jun 2018

दस बार जब पीएम मोदी ने 2017 में देश को गुमराह किया

प्रधानमंत्री मोदी जी ने बीते वर्ष 2017 में कई दावे किये जिनमें से कई गलत साबित हुए या आंशिक रूप से सच साबित हुए। पीएम मोदी द्वारा किए गए ऐसे दस दावों की सूची यहाँ पेश है जो छानबीन करने पर सच साबित नहीं हो पाए। 1. पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी भारत की सबसे पहली मेट्रो ट्रेन के यात्री थे दिल्ली मेट्रो की मेजेंटा लाइन के उद्घाटन के अवसर पर, 25 दिसंबर को मोदी जी ने कहा कि पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी उस समय भारत की अब तक की पहली मेट्रो सेवा के यात्री बने थे जब दिल्ली मेट्रो को 2002 में शुरू किया गया था। यह दावा गलत साबित हुआ। भारत में शुरू होने वाली पहली मेट्रो सेवा कोलकाता मेट्रो थी, जिसकी आधारशिला भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1972 में रखी थी। यह सेवा आखिरकार 1984 में शुरू हुई थी। कोलकाता के बाद दिल्ली मेट्रो भारत की दूसरी मेट्रो सेवा थी। 2. मणिशंकर अय्यर के घर पाक राजनयिकों से मनमोहन सिंह की मुलाकात को गुजरात चुनावों से जोड़ना गुजरात चुनावों से पहले हुई एक रैली में, पीएम मोदी ने यह बताते हुए इशारे में कहा कि एक साजिश रची जा रही है जबकि नई दिल्ली में 6 दिसंबर को कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर के घर पर पाकिस्तानी उच्चायुक्त से मिलने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, भूतपूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और भूतपूर्व सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर इकट्ठा हुए थे। पीएम मोदी का यह संकेत कि इस बैठक और गुजरात चुनावों के बीच कोई रिश्ता है, इसके बाद राजनीतिक रूप से तूफान खड़ा हो गया था। भूतपूर्व चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल दीपक कपूर भी इस बैठक में मौजूद थे और उन्होंने कहा कि इस बैठक में गुजरात चुनाव पर चर्चा नहीं हुई थी। चुनाव खत्म होने के बाद, वित्तमंत्री और राज्यसभा के नेता अरुण जेटली ने राज्यसभा में एक स्पष्टीकरण जारी किया कि प्रधानमंत्री ने भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और भूतपूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की प्रतिबद्धता पर प्रश्न नहीं किया था या उनकी ऐसा करने की मंशा नहीं थी। 3. ‘‘प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना हमने शुरू की‘‘ अक्टूबर में कर्नाटक में एक रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना आरंभ की थी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने बिचौलियों को खत्म करके और फंड के दुरुपयोग को रोककर 57,000 करोड़ रुपये तक की बचत की है।यह दावा भी गलत साबित हुआ क्योंकि डीबीटी योजना वर्ष 2013 में पहली बार आरंभ हुई थी। फरवरी 2013 में केंद्रीय बजट में घोषणा की गई थी कि इस योजना को पिछली तिथि यानी 1 जनवरी 2013 से लागू किया जाएगा। असल में, अगस्त 2017 में स्वयं प्रधानमंत्री कार्यालय (@PMOIndia) के एक ट्वीट में बताया गया कि 2013-14 से वर्तमान वर्ष तक डीबीटी योजना में किस तरह प्रगति हुई। 4. मुगल वंश और कांग्रेस पार्टी के बारे में मणिशंकर अय्यर के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया गुजरात चुनावों के मौके पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और दावा किया जो गुमराह करने वाला साबित हुआ। पीएम मोदी ने कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर के एक बयान का हवाला देकर दावा किया कि अय्यर ने कांग्रेस पार्टी की तुलना मुगल वंश से की थी। अपनी खास शैली में, प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रमुख कांग्रेसी नेता स्वयं यह स्वीकार कर रहे थे कि पार्टी ही परिवार थी और परिवार ही पार्टी थी।हालांकि यह ज्ञात हुआ कि अय्यर के बयान को शरारतपूर्ण ढंग से संपादित किया गया था। कांग्रेसी नेता ने पार्टी अध्यक्ष पद पर राहुल गांधी की ताजपोशी की तुलना औरंगजेब राज से नहीं की थी जैसा कि पीएम मोदी और मुख्यधारा के मीडिया के एक हिस्से ने दावा किया। असल में वे मुगलों के राजवंश और पार्टी के भीतर अध्यक्ष पद के चुनाव की लोकतांत्रिक प्रकृति के बीच विरोधाभास होने की बात कर रहे थे। 5. उत्तर प्रदेश में दिवाली की बजाय ईद पर ज्यादा बिजली आपूर्ति की गई उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों से पहले, फतेहपुर में पीएम मोदी ने एक रैली में कहा कि उस समय समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में चलने वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने दिवाली के बजाय ईद पर ज्यादा बिजली की आपूर्ति की। पीएम मोदी ने कहा, ‘‘रमजान में अगर बिजली मिलती है तो दिवाली में भी बिजली मिलनी चाहिए; भेदभाव नहीं होना चाहिए।‘‘ यह दावा भी झूठा साबित हुआ क्योंकि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, ईद (6 जुलाई 2016) को बिजली आपूर्ति 13,500 मेगावॉट प्रतिदिन थी जबकि दिवाली (28 अक्टूबर से 1 नवंबर 2016) को सभी 5 दिनों में 24 घंटे आपूर्ति के साथ बिजली आपूर्ति 15,400 मेगावॉट प्रतिदिन थी। इन आंकड़ों से साफ तौर पर पता चलता है कि दिवाली पर बिजली आपूर्ति कम नहीं बल्कि ईद की तुलना में ज्यादा की गई थी। 6.कानपुर ट्रेन के पटरी से उतरने का आईएसआई से संबंध जब नवंबर 2016 में कानपुर पुखराया में इंदौर-पटना एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतरे तो 150 लोगों की मौत हो गई। फरवरी 2017 में उत्तर प्रदेश में एक रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने एक हैरतअंगेज दावा किया कि रेल को पटरी से उतारने के लिए पाकिस्तान की आईएसआई जिम्मेदार थी। इस दावे को स्वयं उत्तर प्रदेश पुलिस के तत्कालीन डीजीपी जावीद अहमद और डीजी रेलवे, यूपी पुलिस ने झूठा साबित कर दिया जिन्होंने आधिकारिक रूप से कहा कि ट्रेन के पटरी से उतरने के पीछे आईएसआई का कोई हाथ नहीं है। 7. उत्तर प्रदेश अपराध के मामले में नंबर वन राज्य है प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया कि देश के सभी राज्यों में से उत्तर प्रदेश में अपराध दर सबसे ज्यादा है जबकि रोजाना 24 बलात्कार, 21 बलात्कार के प्रयास, 13 हत्या, 33 अपहरण, 19 दंगे और 136 चोरियां होती हैं। यह टिप्पणी राज्य में एक चुनावी रैली के दौरान की गई थी। हालांकि एक सामान्य तथ्य जांच से यह ज्ञात हुआ कि पीएम मोदी की टिप्पणी गलत और गुमराह करने वाली है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्‍यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, अपराध दर की गणना प्रति 1,00,000 लोगों की जनसंख्या के आधार पर होती है न कि ‘प्रतिदिन‘ माप के आधार पर जैसा कि पीएम मोदी ने संदर्भ दिया था। जबकि स्थिर आधार पर अपराधों की अधिक संख्या अधिक जनसंख्या वाले राज्यों में दर्ज होती है किंतु प्रति 1,00,000 जनसंख्या पर अपराध दर विभिन्न राज्यों के बीच अपराध दर की तुलना करने का एक बेहतर मापक है। एनसीआरबी की वेबसाइट पर उपलब्ध नवीनतम डेटा, यानी 2015 में अपराध डेटा का विश्लेषण करने पर यह पाया गया कि पीएम मोदी के आंकड़े बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए थे। उनके दावे के उलट, ‘प्रतिदिन‘ के लिहाज से प्राप्त किए गए आंकड़ों से पता चला कि अपराध दर के आधार पर अन्य राज्य उत्तर प्रदेश से बहुत आगे थे। 8. मौसम आधारित अनिश्चितताओं से बचाने के लिए बीमा योजना आरंभ की गई ‘‘हमने ऐसी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लाये हैं कि अगर प्राकृतिक कारणों से किसान बुआई नहीं कर पाया तो भी उसको बीमा मिलेगा। ऐसी कोई योजना देखी है?‘‘ यह बात प्रधानमंत्री मोदी ने फरवरी 2017 में उत्तर प्रदेश में एक रैली में कही। पीएममोदी का दावा गुमराह करने वाला दावा था। जैसा कि हिंदुस्‍तान टाइम्‍स द्वारा रिपोर्ट किया गया, किसानों के लिए पिछली बीमायोजना में एक उपयोजना थी जिसका नाम मौसम आधारित फसल बीमा योजना (डब्‍ल्‍यू बीसीआईएस) था। पायलट आधार पर वर्ष 2003 के खरीफ के मौसम के दौरान भारत में मौसम आधारित फसल बीमा योजना आरंभ की गई थी। डब्ल्यूबीसीआईएस ने प्राकृतिक आपदाओं जैसे सूखा, भारी वर्षा होने और पाला पड़ने पर फसलों को बीमा सुरक्षा प्रदान की थी। 9.उत्तर प्रदेश में दलितों के विरुद्ध उत्पीड़न की सर्वाधिक घटनाएँ फरवरी 2017 में बाराबंकी में एक रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया, ‘‘हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा दलितों पर अत्याचार अगर कहीं होता है तो उस प्रदेश का नाम है उत्तर प्रदेश।‘‘ हिंदुस्तान टाइम्स की इस रिपोर्ट के मुताबिक यह दावा सच नहीं है। जैसा कि ऊपर बताया गया, अपराध दर की गणना प्रति 100,000 जनसंख्या के आधार पर एनसीआरबी द्वारा की जाती है और इसका आधार अब तक दर्ज हुए अपराधों की निश्चित संख्या नहीं होती है। जहाँ तक अनुसूचित जाति (एससी) के खिलाफ अपराधों का संबंध है, उत्तर प्रदेश में अपराध दर प्रति 100,000 जनसंख्या पर 20 थी। एनसीआरबी डेटा के अनुसार, उत्तर प्रदेश की तुलना में कम से कम 11 राज्यों में इससे खराब अपराध दर दर्ज की गई। अनुसूचित जाति के खिलाफ सर्वाधिक अपराध दर प्रति 100,000 जनसंख्या के लिए 57 अपराधों के साथ राजस्थान में दर्ज की गई। 10.राहुल गांधी ने ‘नारियल जूस‘ और ‘आलू की फैक्ट्री‘ का उल्लेख किया 1 मार्च, 2017 को उत्तर प्रदेश की एक रैली में पीएम मोदी ने दावा किया कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि वह ‘नारियल जूस‘ निकालने और इसे लंदन में बेचने में मणिपुर के किसानों की मदद करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने दावा किया था कि वह किसानों के लिए एक आलू की फैक्ट्री लगाएंगे। सच्चाई यह है कि राहुल गांधी ने नारियल या ‘नारियल जूस‘ की नहीं बल्कि अनानास जूस की बात की थी। पीएम मोदी के इस दावे के संबंध में कि राहुल गांधी ने आलू फैक्ट्री लगाने के बारे में कहा था, असल में राहुल गांधी ने आलू के चिप्स बनाने की फैक्ट्री लगाने की बात की थी न कि आलू बनाने की फैक्ट्री की बात कही थी

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